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नकली धर्मनिर्पेक्षता(secularism) ?

लोग कहते हैं युनान मिश्र रोमा सब मिट गए कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी पर यह भी सत्य है कि उस कौम का इतिहास नहीं होता, जिसको मिटने का एहसास नहीं होता, सम्भल कर एकजुट होकर कदम उठाओ ए हिन्दुओ, बरना तुम्हारी दास्तां तक न होगी दास्तांनों में...
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भारत में आज बहुत ही खतरनाक स्थिति बनती जा रही है अपने हिन्दूराष्ट्र भारत में विदेशी संस्कृति से प्रेरित मीडिया, खुद को सैकुलर कहलवाने वाले राजनीतिक दलों, बिके हुए देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों, खुद को सामाजिक कार्यकर्त्ता कहलवाने वाले गद्दारों, आतंकवादियों व परजीवी हिन्दुविरोधी लेखकों का एक ऐसा सेकुलर गिरोह बन चुका है जो भारत को सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से तबाह करने पर आमादा है। इस गिरोह को हर उस बात से नफरत है जिसमें भारतीय संस्कृति व राष्ट्रवाद का जरा सा भी अंश शेष है । यह गिरोह हर उस बात का समर्थन करता है जो देशद्रोही कहते या करते हैं । यह गिरोह देश की रक्षा के लिए जान खतरे में डालकर जिहादी आतंकवादियों का सामना करने वाले देशभक्त बहादुरों से अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहा है और न जानें उनके लिए क्या-क्या अपशब्द प्रयोग रहा है। देशद्रोही जिहादियों व अन्य आतंकवादियों को बेचारा गरीब अनपढ़ व सत्ताया हुआ बताकर हीरो बनाता जा रहा है । सेवा के नाम पर छल कपट और अवैध धन का उपयोग कर भोले-भाले बनवासी हिन्दुओं को गुमराह कर उनमें असभ्य पशुतुल्य विदेशी सोच का संचार कर हिन्दुविरोधी-राष्ट्रविरोधी मानसिकता का निर्माण करने वाले धर्मान्तरण के ठेकेदारों को हर तरह का सहयोग देकर देश की आत्मा हिन्दू संस्कृति को तार-तार करने में जुटा है। यह गिरोह एक ऐसा तानाबाना बुन चुका है जिसे हर झूठ को सच व हर सच को झूठ प्रचारित करने में महारत हासिल है।
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vijay - Apr. 3, 2009
सुनील जी
बहुत  मेहनत  करते हैं आप.
 आपके  लेख  पढ़े
विद्रूपताओं पर  आप का आक्रोशित  होना  स्वाभाविक  है.
- विजय
pradeep - Dec. 3, 2009
बिल्कुल सही लिखा है भईया इस नकली सेकुलर मीडिया के बारे में
neeraj jha - Dec. 28, 2009
 namsakr sunil apka  jee hinduon ke liye  apka kiya gaya kam atulniy hai parntoo sirf lekh leekne se ya dhrna pradarsan se kooch nahee hoga hum hinduon ko ek jut hokar hindustan main hinduon per hone wale julmo ka veerodh na kewal veerodh balkee sasatre veerodh karna tabhee hiduon ka 5000 warsh purana astitva bach payega shreee man apko bhee puta hoga saree rajneteek parteeyan vote bank ke liye apna iman aur dharm ko daw par luga rahe iliye hindutav kee raksha hinduaon ko apne aap hee karnee hogee apse yehee kehna chonngga shreeman ke aap ek avsar dijiye hino, hindee aur hindustan ke liye hum apna sab kooch arpeet kar denge jay hind
September, 2010

पकड़े जाने के डर से अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को अपने साथी बामपंथी आतंकवादियों से छुड़वाया।

 पकड़े जाने के डर से अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को अपने साथी बामपंथी आतंकवादियों से छुड़वाया।

हमने 04-09-10 को लिखा था कि किस तरह अग्निवेश ने IBN7 के कार्यक्रम में सवीकार किया कि क्योंकि विहार के मुख्यमन्त्री नितीश कुमार ने माओवादी आतंकवादी आजाद के मारे जाने के विरोध में ब्यान देने व जांच की मांग करने से मना कर दिया इसलिए वामपंथी आतंकवादियों ने नितीश जी को सबक सिखाने व चुनाबों में नुकसान पहुंचाने के लिए पुलिस वालों का अपरहण किया। कार्यक्रम के दौरान अग्निवेश द्वारा इस तरह खुद ही सच्चाई जनता के सामने रखने के कारण एक बात सपष्ट हो गई कि वाकी बचे तीन पुलिस वालों को कोई नुकसान नहीं होने वाला।क्योंकि अब अगर बन्धक पुलिस वालों को छोड़ा न जाता या कोई नुकसान पहुंचाया जाता तो इसकी जांच के दायरे अग्निवेश जरूर फंस जाते। खुद को गिफ्तारी से बचाने के लिए अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को छोड़ के निर्देश जारी किए।

हमारा 04-09-2010 को लिखा गया लेख

 



हम अग्निवेश जी को एक लम्बे समय से समझने की कोशिश कर रहे हैं। जितना अभी तक हम समझ पाए हैं अग्निवेश की जिन्दगी का एक अटूट हिस्सा है भारत विरोध व आतंकवादी प्रेम। आतंकवादी चाहे पाक समर्थक हों या फिर चीन समर्थक या फिर रोम समर्थक अग्निवेश को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता उनके पास आतंकवादियों द्वारा किए हर नरसंहार का आसान सपष्टीकरण उपलब्ध रहता है ।


लेकिन इसवार मामला ज्यादा गम्भीर है क्योंकि जो कुछ अग्निवेश ने 03-09-2010 शाम को IBN7 पर आशुतोष के साथ कहा वो सपष्ट संकेत देता है कि इसवार पुलिसवालों का अपरहण सीधे तौर पर अग्निवेश के इसारे पर नितीश कुमार को सबक सिखाने के इरादे से हुआ है।


कार्यक्रम के दौरान जब आशुतोष ने नितीश जी के माओवादियों के प्रति सहानुभूति रखने की बात उठाकर यह कहने की कोशिश की कि क्योंकि नितीश जी के मन में बामपंथी आतंकवादियों के प्रति विशेष सहानुभूति है इसलिए नितीस जी के राज्य में इस तरह का अपहरण जो कि नितीश जी को राजनितीक हानि पहुंचाने के इरादे से किया गया प्रतीत होता है विलकुल गलत है तो अग्निवेश जी ने एकदम भाव में आकर कहा कि अपहरण से पहले उन्होंने (अग्निवेश) ने खुद नितीश जी से वामपंथी आतंकवादी आजाद के मारे जाने की जांच सबन्धी बयान देने की मांग की थी जिसे नितीश जी ने नहीं माना ---परिणाम स्वारूप ये अपहरण हुआ।


इसके साथ ही अग्निवेश जी ने बामपंथी आतंकवादियों द्वारा पुलिसवाले के कतल को भी सही ठहराने की कोशिश की


साथ हगी ये भी कहा कि अगर नितीश जी दो लाइन की सटेटमैंट लिखकर मिडीया के सामने दे दें तो बन्धक पुलिस वाले छोड़े जा सकते हैं।


स्टेंटमैंट में नितीश जी को आतंकवादियों से उनकी बात नहीं माने जाने पर माफी मांगनी होगी व आतंकवादियों की बात मानने का बायदा करना होगा मतलब पूरी कानून बयवस्था का आतंकवादियों के सामने पूर्ण समर्पण। इतना ही नहीं अग्निवेश ने तो यहां तक कहा कि कानून ब्याबस्था संविधान की बात कर सरासर गलत है फैसला आतंकवादियों के जंगलराज के अनुशार होना चाहिए।आप ये कार्यक्रम IBN7 पर देख सकते हैं।


इस सारे कार्यक्रम का सार ये है कि क्योंकि नितीश जी ने अग्निवेश जी की बात(आतंकवादी आजाद की मौत की जांच करने की मांग) नहीं मानी इसलिए उनको सबक सिखाने के लिए पुलिस वालों का अपहरण कर इनमें से एक की हत्या कर दी गई वाकियों की हत्या करने की त्यारी है।


हमारे विचार में अग्निवेश को तुरन्त पुलिस के जवानों का अपहरण करवाने के बाद कतल करने के अपराध में गिरफ्तार कर जांच को आगे बढ़ाना चाहिए। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि


1. एक तो इन तीन पुलिस वालों की जान बच जाएगी


2. दूसरा अपहरण का सच सबके सामने कुछ दिनों मे आ जायगा


3. तीसरा अग्निवेश ,गौतम नबलखा ,अरूंधती राय जैसे मानबाधिकारवाद के चोले में छुपे देश के गद्दारों की असलियत कानून से सबके सामने आ जाएगी।



 

4. कांग्रेस के नेतृत्व में देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह द्वारा आतंकवाद(मुसलिम,वामपंथी 


वामपंथी आतंकवाद से साबधान

 इसाई) का उपयोग किस तरह राजनितीक हथियार के रूप में किया जा रहा है इसकी सच्चाई देश की भोली-भाली गरीब जनता के सामने उजागर हो जायगी।


5. अन्त में न जाने और कितने पुलिस व आम नागरिकों के जान-माल की रक्षा इन गद्दारों से हो सकेगी।


नितीश जी जल्दी से अग्निवेश को गिफ्तार कर सच्चाई को जनता के सामने लाकर देश को बचाने में अपनी भूमिका का निर्वाहन करें ।


अगर नितीश जी ये नहीं करते हैं तो छतीशगढ़ के मुख्यमन्त्री जी को अग्निवेश को उसके गिरोह सहित गिफ्तार कर ये सच्चाई सबके सामने लानी चाहिए।


अगर वो भी इन गद्दारों को हाथ नहीं डालते हैं तो फिर भगवा क्रांतिकारियों के साकार रूप के सामने आने का इन्तजार करना चाहिए ताकि वो हिन्दू क्रांतिकारी ऐसे गद्दारों व गद्दारों के मददगारों को चौराहे पर गोली से उड़ाकर देश की रक्षा कर सकें।


September, 2010

क्या आप डा. भीमराव अम्बेडकर जी को जानते हैं?

 

 

19वीं शताब्दी में अनेक अवतारी महापुरूषों ने भारत की धरती पर जन्म लिया। 14 अप्रैल 1881 का दिन ऐतिहासिक दिन

था। इस दिन डा. भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म हुआ। वर्षप्रतिपदा 1889 को डा. हैडगेवार जी का जन्म हुआ । 1983 में

डा. हेडगेवार जी के जन्मदिन वर्षप्रतिपदा पर समरसता शब्द डा. अम्बेडकर जी की ही देन है। परमपूजनीय गुरूगोविन्द सिंह

ने क्रांति का सूत्रपात किया। सिंहशब्द नाम ने न्यूनता ग्रंथि से ग्रसित करोंड़ों के समाज को आन्दोलित , प्रेरित करने का

यशस्वी प्रयत्न किया।

अवतारीमहापुरूषों का जीवन वाल्यकाल से ही संकटों में गुजरता है जिस प्रकार भगवान राम ,भगवान कृष्ण , स्वामी

 

विवेकानन्द व गुरूगोविन्द सिंह जी का बाल्यकाल संकटों व संघर्षों में गुजरा---डा हेडगेवार जी का वाल्यकाल भी संकटों के

 

दौर से ही गुजरा----डा. हेडगवार जी ने 13 वर्ष की आयु में ही अपने माता-पिता को एक ही चिता में मुखाग्नि देने के बाद

 

सारा जीवन कष्टों व संघर्षों में बिताया।घर में चाय तक पीने के लिए पैसे उपलब्ध नहीं रहते थे।

          उसी प्रकार डा. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन भी कष्टों व संघर्षों  के लिए ही जाना जाता है। डा भीमराव

 

अम्बेडकर जी ने भी न्यूनता ग्रंथि से ग्रसित करोंड़ों हिन्दूओं को एक नई राह दिखाई वो राह जो उनके अन्दर आत्मविश्वास

 

व आशा का संचार करती थी।

 

डा. भीम राव जी के एक प्रिय गुरू जी का अन्तिम नाम अम्बेडकर था उन्हीं के नाम पर डा. भीमराव जी का नाम भीम

 

राव अम्बेडकर हुआ। डा. भीमराव अम्बेडकर जी की माता जी का देहांत तो 5वर्ष की आयु में ही हो गया । फिर भी उन्हें

 

अपने पिता जी से घर में ही अच्छे संस्कार मिले। मुम्बई में एक ही कमरे में दोनों रहते थे ।एक सोता था तो एक पढ़ता

 

था इतना छोटा कमरा था वो। आगे चलकर इन्हें केअसकर नाम के व्यक्ति( सज्जन) मिले जिन्होंने इनका परिचय बड़ौदा के

 

महाराजा सहजराव गायकवाड़ जी से करवाया ।गायकवाड़ जी ने इन्हें छात्रवृति लगा दी । गायकवाड़ जी ने अम्बेडकर जी को

 

विदेश भेजा बाद में लन्दन गए। लन्दन में खरीदी पुस्तकें मालबाहक जहाज में भेजने के कारण डूब गईं जिनका मुआवजा

 

2000 रूपए मिला फिर बड़ौदा गए। Ph. D करने पर बड़ौदा आने के बाद अम्बेडकर जी को तरह तरह की समस्याओं का

 

सामना करना पड़ा। जिससे उनके मन में पीड़ा तो हुई पर कभी उनके मन में कटुता पैदा नहीं हुई।

 

 

फिर उनके मन में LAW की पढ़ाई करने का विचार आया। कोहलापुर के महाराजा ने उन्हें लंदन भेजा। डा. अम्बेडकर जी ने

 

संस्कृत सीखी ।स्पृश्य-अस्पृश्य क्या है जानने का प्रयत्न किया।वेद,  उपनिषद् , भगवद गीता सबका डटकर अध्ययन किया -

 

-साहित्य लिखा। डा.अम्बेडकर जी अन्त में इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि छुआ-छूत मुगलकाल की देन है । हिन्दू धर्म में इसका

 

कोई स्थान नहीं। आर्य-द्रविड़ भेद पैदा करना अंग्रेजों की हिन्दूओं को आपस में लड़वाने की चाल है ऐसा उन्होंने खुद महसूस

 

किया व ये सब उन्होंने लोगों को समझाने का भी प्रयत्न किया। आर्य बाहर से नहीं आए ये डा. अम्बेडकर जी ने कहा।

 

 

 WHO ARE SHUDRAS में अम्बेडकर जी ने कहा जिस हिन्दू धर्म का ज्ञान इतना श्रेष्ठ है कि उस ज्ञान के प्रभाव से चींटी,

 

सांप, तुलसी मतलब छोटे से चोटे जीव से लेकर पेड़-पौधों तक की पूजा करने वाला हिन्दू,  हिन्दू को न छुए ऐसा कैसे हो

 

सकता है ?

 

 

उन्होंने सपष्ट कहा कि समस्या धर्म की नहीं समस्या मानसिकता की है खासकर स्वर्ण मानसिकता जो गुलामी के प्रभाव के

 

कारण विकृत हो चुकी है जिसे बदलने की जरूरत है । यदि स्वर्ण मानसिकता बदलेगी तो हिन्दू समाज बदलेगा ।

 

 

उन्होंने सत्याग्रह का शस्त्र उठाया। भगवद गीता को हथियार बनाया।तालाब के पानी हेतु---महाड़ सत्यग्रह ।नासिक के

 

कालराम मन्दिर में प्रवेश हेतु सत्याग्रह किया लाठियां खाईं।

 

 

1935 में रूढ़ीबादिता व भ्रम के शिकार लोगों को Shock TREATMENT देते हुए कहा सुधरना है तो सुधर जाओ वरना मैं

 

धर्मांतरण कर लूंगा। जबकि वासत्विकता यह है कि उन्होंने कभी धर्मांतरण किया ही नहीं। उनके सारे सहित्य में हिन्दू राष्ट्र

 

शब्द का प्रयोग बार-बार हुआ है उन्होंने जातिविहीन समाज रचना, राष्ट्र संगठन सब पर लिखा है।

 

 

1947 में मुसलिम अलगावबाद के परिणास्वारूप देश का विभाजन हो गया । जिस पर अम्बेडकर जी ने सपष्ट कहा कि अब

 

जबकि मुसलमानों को अलग देश दे दिया गया है तो हमें पाकिस्तान से सब हिन्दूओं को भारत ले आना चाहिए व भारत से

 

सब मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए ताकि मुसलमान अपने घर पाकिस्तान में सुख से रहें और हिन्दू अपने घर

 

भारत में सुख से रहें। आज चारों ओर फैले मुसलिम आतंकवाद को देखकर आप खुद समझ सकते हैं कि डा. अम्मवेडकर

 

जी कितने दूरदर्शी थे।

 

विभाजन के बाद Hindu Code Bill अम्बेडकर जी की हिन्दू समाज को सबसे बढ़ी देन है । इसी में अम्बेडकर जी ने हिन्दू

 

किसे कहते हैं, इसकी व्याख्या की जिसमें सपष्ट कहा गया कि विदेशी धारणाओं इस्लाम और इसाईयत को छोड़कर भारत में

 

रहने वाले (हिन्दू-सिख-बौद्ध-जैन----इत्यादि)  सब लोग हिन्दू हैं।

 

 

ये उन्हीं की दूरदर्शिता थी कि उन्होंने  SC/St के नाम से वंचित हिन्दूओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था बनाकर

 

अंग्रेजों के बड़े पैमाने पर धर्मांतरण करने के षडयन्त्र को असफल किया।

 

 

अम्बेडकर जी ने सबको राजकीय समानता दिलवाते हुए सबके लिए एक ही वोट का प्रावधान किया। डा. भीमराव अम्बेडकर

 

जी ने 1965 में कहा कि वेशक मेरा जन्म हिन्दू धर्म में हुआ है पर हिन्दू के रूप में मैं मरूंगा नहीं ।

 

 

अपनी जिन्दगी में जाति के कारण भी कई तरह के असहनीय कष्ट सहने के बाद भी उन्होंने हिन्दू हित के लिए काम करते

 

हुए अन्त में बौद्ध मत अपनाया जो कि हिन्दू समाज का अपना ही मत है इसलिए उसे धर्मांतरण नहीं कहा जा सकता।

 

उन्होंने किसी विदेशी अबधारणा को नहीं अपनाया। ये भी उनके मन में अपने देश-संस्कृति के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है।

 

 

 

 

हैदराबाद के निजाम द्वारा 40 करोड़ ( आज आप अनुमान लगा सकते हैं कि कितना अधिक धन बनता है ये) व औरंगावाद

 

में बंगला,जमीन का प्रलोभन देने के बाबजूद डा. भीम राव अम्बेडकर जी ने अत्याचारी इस्लाम स्वीकार नहीं किया ।

 

 

इसी तरह उन्हें ईसाईयों द्वारा ईसाईयत अपनाने के लिए भी कई तरह के प्रलोभन दिए गए लेकिन उन्होंने ईसाई बनना भी

 

सवीकार नहीं किया।

 

 

 वो अच्छी तरह जानते थे कि ये दोनों विदेशी अवधारणायें देशहित-हिन्दू हित में नहीं हैं ।

 

 

उन्होंने अपने वंचित हिन्दू भाईयों  को सपष्ट आदेश दिया कि बेशक अपने हिन्दू भाईयों में कमियां हैं वो गुलामी के प्रभाव

 

के कारण स्वर्ण मानसिकता के शिकार हैं पर अत्याचारी मुसलमान व लुटेरे ईसाई किसी भी हालात में हमारे हित में नही हो

 

सकते ।

आज जिस तरह धरमांतरित हिन्दूओं को दलित व काले ईसाई कहकर पुकारा जा रहा है व धर्मांतरित हिन्दूओं को जिस

 

तरह पाकिस्तान व बंगलादेश में मस्जिदों में बमविस्फोट कर मारा जा रहा है ,मुहाजिर कहा जा रहा है भारत में भी

 

मुसलिम बहुल क्षेत्रों में निशाना बनाया जा रहा है उसे देख कर आप समझ सकते हैं कि डा. भीमराव अम्वेडकर जी कितने

 

दूरदर्शी व देशहित-हिन्दूहित में कितने विस्तार से सोचने व निर्णय लेने में समर्थ थे।

 

 

दुनिया को धर्म सिखाना ही भारत की विभूतियों का काम है Deep Cultural Unity in our Society(India) में लिखते हैं कि आपस

 

में झगड़ों के बाबजूद हिन्दू समाज एक है और एक रहेगा । मानसिकता में परिवर्तन के साथ ही ये झगड़े भी समाप्त हो

 

जायेंगे।

1916 में लखनऊ पैक्ट में 13% मुसलमानों को 30% सीटें देने का उन्होंने कांग्रेस के हिन्दूविरोधी रूख के बाबजूद डटकर विरोध

 

किया। उन्होंने कहा कि जो बात हिन्दू हित की नहीं वो देशहित की कैसे हो सकती है।आज हर देशभक्त को अपने घर में डा.

 

भीमराव अम्बेडकर जी का चित्र लगाना चाहिए व उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयत्न करना चाहिए।

August, 2010

जब लोग अपनों की लाशों के ढेर पर बैठकर खुशियां मनायें ,मुबारकवाद दें तो भला कोई क्या जबाब दे?

जब लोग अपनों की लाशों के ढेर पर बैठकर खुशियां मनायें ,मुबारकवाद दें तो भला कोई क्या जबाब दे?

 


 



इन्सान जिन्दगी में अक्सर ऐसे पलों से गुजरते हैं जिन्हें भूलकर भी भुलाया नहीं जा सकता।


भारत जिस पर पहला मुसलिम आतंकवादी हमला सातवीं सताब्दी में तब हुआ जब पहला मुसलिम आतंकवादी मुहमम्दविन कासिम भारत में अरब देशों से प्रवेश किया।



तब से लेकर आज तक मुसलिम आतंकवादियों ने पीढ़ी दर पीढ़ी पीछे मुढ़कर नहीं देखा । एक के वाद एक हिन्दूओं के नरसंहारों को अन्जाम दिया । हिन्दूओं की मां-बहन-बहु-बेटियों की इज्जत-आबरू से खिलवाड़ किया सो अलग।




मुसलमानों द्वारा किए गए हिन्दूओं के इतने कतलोगारद के बाबजूद भी कभी हिन्दूओं ने मुसलिम आतंकवादियों के विरूद्ध खुले युद्ध की घोषणा कर आक्रमणकारी इस्लाम को भारत से उखाड़ फैंकने की कसम नहीं उठाई ।


उल्टा आक्रमणकारी मुसलामन भारत के जिस हिस्से में भी 35 प्रतिशत से अधिक हो गए उस हिस्से से इन आतंकवादी मुसलमानों ने हिन्दूओं का नमोनिशान मिटा दिया।


हद तो तब हो गई जब 1946 में लगभग 15% मुसलामानों ने जिहादी आतंकवादी जिन्ना के नेतृत्व में हिन्दूओं के विरूद्ध खुले युद्ध की घोषणा कर डाली ।


जिसे नाम दिया गया DIRECT ACTION। जिसकी घोषणा होते ही कलकता में मुसलमानों ने 5000 हिन्दूओं का कत्ल कर एक बड़े क्षेत्र को हिन्दूविहीन किया उसके बाद बंगाल के ही नौखली नामक स्थन पर इससे बड़े पैमाने पर हिन्दूओं का कत्लयाम मुसलमानों द्वारा किया गया ।


जिसके बाद मुसलिम आतंकवादियों



 के सबसे बड़े हमदर्द मोहनदासकर्मचन्द गांधी को भी कहना पड़ा “ मुसलिम अत्याचारी राक्षस हैं व हिन्दू कायर” ।



ये आतंकवीदियों का हमदर्द भूल गया कि हिन्दूओं के इन नरसंहारों के लिए मुसलिम आतंकवादियों से ज्यादा जिम्मेदार नेहरू


व खुद गांधी जैसे मुसलिम आतंकवादियों के मददगार व हिन्दू एकता के विरोधी हैं जिन्होंने क्रांतिकारियों व हिन्दू संगठनों की हर उस कोशिश को अडंगा लगाया जिसमें देशभक्तों को गद्दारों के विरूद्ध संगठित करने की कोशिश की गई ।


परिणामस्वारूप गद्दार तो मस्जिदों व मदरसों के माध्यम से देशभक्तों के विरूद्ध युद्ध की तैयारी करते रहे लेकिन हिन्दू संगठनों द्वारा देशभक्तों को संगठित करने के लिए देशहित में उठाए गए किसी भी कदम को इन मुसलिम आतंकवादियों के समर्थकों ने देश के विरूद्ध बताकर मुसलिम आतंकवादियों को हिन्दूओं का एकतरफा नरसंहार अंजाम देने का खुला नयौता दे दिया।


क्योंकि हिन्दू किसी भी तरह से इन मुसलिम आतंकवादियों से लड़ने के लिए न तो तैयार थे न उन्हें ऐसी उम्मीद थी कि मुसलमान राक्षसों की तरह हिन्दूओं का कत्लयाम कर हिन्दूओं की मां-बहन-बहू-बेटियों को अपवित्र करने के लिए बैहसी जानवरों की तरह टूट पड़ेंगे।


ऐसा नहीं कि हिन्दूओं के साथ मुसलमानों ने ये राक्षसी व्यवहार पहलीबार किया हो लेकिन हिन्दूओं के अन्दर अपने जयचन्दों ने हमेशा मुलमानों से पड़ने वाले टुकड़ों के बदले अपने हिन्दू भाईओं को मुसलमानों के बारे में गलत जानकारी दी कि मुसलमान भी हिन्दूओं की तरह इन्सान हैं राक्षस नहीं।


लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि जब भी मुसलमानों को मौका मिला मुसलमानों ने सिद्ध कर दिया कि इस्लाम शैतानों और राक्षसों के समूह का दूसरा नाम है।


इस तहर 1946 में जिन्ना द्वारा DIRECT ACTION की घोषणा के साथ कलकता में 5000 निर्दोश निरीह हिन्दूओं का कत्ल कर जो हिन्दूओं का कत्लयाम शरू हुआ उसमें लाखों हिन्दूओं का कत्ल कर लाखों मां-बहन-बहू-बेटियों को अपवित्र किया गया।


जिसका परिणाम हुआ 14-15 अगस्त 1947 को भारत का तीन हिस्सों में विभाजन । आज के हालात में इसका सीधा सा उधारण है कशमीरघाटी जहां 60000 हिन्दूओं को कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर आए दिन सैनिकों पर हमले किए जा रहे हैं।


हमें तो हैरानी होती है उन बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं पर जो मुसलिम हिंसा के शिकार हुए लगभग 10000000 अपनों की लाशों व यातनाओं पर बैठकर इस दिन को स्वतन्त्रता दिवस कहकर संबोधित करते हैं व एक दूसरे को कत्लोगारत के इस दिन पर बधाईयों देते हैं।


वैसे भी शहीद भगत सिंह जी ने 23 वर्ष की आयु में अपनी कुर्बानी इसलिए दी थी ताकि शासन विदेशी इसाईयों से लेकर अपनी भारत मां की सन्तानों के हाथों में दिया जा सके लेकिन क्या आज देश आजाद है?

 आज भी तो बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं की मूर्खता व कायरता की बजह से देश का प्रधानमंत्री एक विदेशी इटालियन अंग्रेज एंटोनिया का गुलाम है व देश को जिस मुसलिम आतंकवाद से छुटकारा दिलवाने के लिए नेहरू-गांधी ने देश का विभाजन स्वीकार किया आज देश का हर कोना उसी मुसलिम आतंकवाद का शिकार है।



भारत की आजादी तब तक अधूरी है जब तक हर आक्रमणकारी को देश से बाहर खदेड़ कर देश के हर कोने से आक्रमणकारियों की हर निशानी को तहश नहस नहीं कर दिया जाता


आओ आज के दिन देश को आक्रमणकारियों व उनकी कलंकित निशानियों से मुक्त करवाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का बीड़ा उठायें ..............


याद रखो


उस कौम का इतिहास नहीं होता जिसे मिटने का एहसास नहीं होता


एक जुट होकर मिलजुलकर कदम उठाओ ऐ हिन्दूओं


वरना तुम्हारी दास्तां तक न होगी दास्तानों में.......








August, 2010

क्या बुर्का आतंकवादियों द्वारा सुरक्षाबलों को धोखा देने के लिए सुरक्षाक्वच के रूप में उपयोग किया जा रहा है?



आज संसार के अधिकतर देशों में मुसलिम आतंकवादियों के बढ़ते हमलों के परिणामस्वारूप आतंकवादियों द्वारा बुर्के को सुरक्षाक्वच के रूप में प्रयोग किए जाने के खतरे को ध्यान में रखते हुए एक के वाद एक देश बुर्का प्रथा पर प्रतिबन्ध लगा रहा है या फिर प्रतिबन्ध लगाने का मन बना रहा है।


भारत में भी मुसलिम व माओवादी आतंकवादियों के षडयन्त्र अपने चर्म पर हैं।


हाल ही में लालगढ़ में माओवादी आतंकवादियों की रैली में पहुंची ममता बैनर्जी की सभा से भी एक ऐसे ही अपराधी को कब्जे में लिया गया जो खुद को बुर्के में छुपाकर अपनी गतिविधी को सुरक्षाबलों की नजरों से बुर्के के सहारे छुपा रहा था।


आज ही एक समाचार सामने आया जिसमें सौतेले माता-पिता ने बच्चे पर अमानबीय अतयाचार करने के बाद जब बच्चा मरने वाला था तो उसके इलाज के लिए उसे बुर्के में छुपाकर डाकटर के पास ले गए। ये राक्षस नहीं चाहते थे कि इस बच्चे की मौत से वो एक बन्धुआ मजदूर खो दें। ये मामला तब उजागर हुआ जब बच्चे को किसी काम का न देखकर इन दुष्टों ने दादी के पास वापिस भेजा अन्यथा ये लोग अपने पाप को बुर्के के सहारे छुपाने में सफल रहे थे।


काबुल में भारतीयों पर हमला करने वाले मुस्लिम आतंकवादी भी अपने विस्फोटक बुर्के में छुरपाकर ही लाए थे। जिसमें भारतीयों को जानमाल का भारी नुकसान उठाना पड़ा।


अभी कुछ दिन पहले जब हम तनौजा जेल में थे तो हमने देखा कि एक महिला बाहर से तो बुर्का पहन कर आयी पर अन्दर आते ही उसने बुर्का हटा दिया विना किसी के आदेश के हमारे सामने। मतलब यह महिला किसी मकसद से बुर्के का उपयोग कर रही थी न कि किसी आस्था को पूरा करने के लिए।


बैसे भी किसी भी सभ्य समाज में जरूरत से जयादा नकाब घर में तो ठीक है वेशक वहां भी जायज नहीं ठहराया जा सकता लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर यह नकाब वाकी लोगों के अन्दर दहसत व असुरक्षा का महौल पैदा करता है।


अब जबकि आतकंकवादी बुर्के को खुद को सुरक्षाबलों को धोखा देने के लिए उपयोग कर रहे हैं तो इन हालात में सभी सही दिशा में सोचने वाले लोगों को सरकार पर दबाब बनाकर भारत को इस कलंक से निजात दिलवाने की कोशिस कनी चाहिए ताकि आम जनता की रक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।


बैसे भी आज जब हम आधुनिकता के युग में जी रहे हैं व खुलेपन की बात कर रहे हैं तो हमें हैरानी होती है ये देखकर कि खुलेपन के ठेकेदार धर्मनिर्पेक्षतावादियों को बुर्के के पीछे दफन कर रखी गई होनहार मुसलिम लड़कियों की घुटन कभी महसूस नहीं होती अगर होती भी है तो मुसलिम आतेंकवादियों के डर से डंके की चोट पर उनकी बोलती बन्द रहती है।






July, 2010

हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान

हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान
 
 

1985 में अलकायदा की स्थापना ने बाद बाकी सारी दुनिया की तरह भारत में भी मुस्लिम जिहादियों को नये सिरे से संगठित होने का मौका मिला ।


जिसका परिणाम कश्मीर घाटी में 1989-90 में मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान के रूप में देखने को मिला । जिसके परिणामस्वरूप आज सारी कश्मीर घाटी को हिन्दुविहीन कर दिया गया ।


जिस तरह ये सैकुलर गिरोह हिन्दुओं पर किय गए हर हमले के बाद राम मन्दिर का तर्क देकर इसे बदले में की गई कार्यवाही बताकर सही ठहराने का दुससाहस करता है। अगर इनके इस तर्क को माना जाए तब तो जिस तरह मुस्लिम जिहादियों ने मुस्लिमबहुल कश्मीर घाटी से सब हिन्दुओं का सफाया कर दिया उसी तरह बदले में हिन्दुओं को सारे हिन्दुबहुल भारत से मुसलमानों का सफाया कर देना चाहिये ।


जिस तरह कश्मीर में वहां की मुस्लिम पुलिस ,प्रैस, नेताओं ने मुसलमानों के हिन्दुमिटाओ-हिन्दुभगाओ अभियान को सफल बनाने में हर तरह का सहयोग दिया तो इनके इस तर्क के अनुसार सब हिन्दू पुलिस, प्रैस व मीडिया व नेताओं को हिन्दुओं के इस मुस्लिम मिटाओ मुस्लिम भगाओ अभियान में सहयोग करना चाहिए ।


जिस तरह हुरियत कान्फ्रैंस ने सारे देश व संसार के मुसलमानों का समर्थन आर्थिक सहयोग इन मुसलमानों के हिन्दू मिटाओ हिन्दू-भगाओ अभियान के लिए जुटाया वैसा ही समर्थन व आर्थिक सहयोग सब हिन्दू संगठनों को मिलकर हिन्दुओं के इस अभियान को सफल बनाने के लिए जुटाना चाहिए ।


अतः हम तो यही कहेंगे कि अगर हिन्दू इस तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रहे हैं तो उसे उनकी कमजोरी मानकर उन्हें साम्प्रदादिक व आतंकवादी कहकर दुनिया में फजूल में बदनाम न किया जाए क्योंकि जिस दिन हिन्दुओं ने इस बदनामी से तंग आकर इसे यथार्थ में बदलने का मन बना लिया उस दिन न हिन्दुओं पर हमला करने वाले बचेंगे न हमलों का समर्थन करने वाले बचेंगे ।


हिन्दू मुस्लिम जिहादियों के हर हमले को सहन कर रहे हैं अपने हिन्दू भाईयों को अपने सामने कत्ल होता देख रहे हैं। फिर भी इन्सानित व मानवता की रक्षा की खातिर खामोश हैं पुलिस प्रशासन सरकार से न्याय की उम्मीद लगाये बैठे हैं । दूध पीते बच्चों तक को इन जिहादियों ने





मार्च 1998 में मुस्लिम जिहादियों द्वारा कत्ल किया गया दूध पीता बच्चा


आज 21बीं शताब्दी में हिन्दुबहुल भारत में हलाल कर दिया। सब तमाशा देखते रहे हिन्दू को ही बदनाम करते रहे और हिन्दू फिर भी खामोश रहा । अल्पसंख्यकवाद के नाम पर ईसाईयों व मुसलमानों के बच्चों को विशेषाधिकार देकर हिन्दुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाकर रख दिया फिर हिन्दू खामोश रहा । सेना में हिन्दुओं की अधिक संख्या पर सवाल उठा दिया गया फिर भी हिन्दू खामोश रहा । हिन्दुओं के लगभग हर सन्त को बदनाम करने का दुस्साहस किया फिर भी हिन्दू खामोश रहा । अन्त में हिन्दू धर्म के आधार स्तम्भ भगवान राम के अस्तित्व को नकार दिया फिर भी हिन्दू खामोश रहा । ये सब कुछ सहने के बाद हिन्दू को दुनिया भर में आतंकवादी कहकर बदनाम कर दिया हिन्दू फिर भी खामोश रहा ।


लेकिन अब हिन्दू खामोश नहीं बैठने वाला । अब उसने इन हमलों से खुद निपटने का मन बना लिया है अब वो समझ गया है कि ये वो ही मुस्लिम जिहादी हमला है जिसका सामना हिन्दुओं ने सैंकड़ों वर्षों तक किया है। इस आतंकवादी हमले का सामना हमें कृष्ण देवराय, रानी दुर्गावती, बन्दा सिंह बहादुर जैसे महान योद्धाओं की तरह ही करना पड़ेगा ।


इसके लिए हमें वो सब मार्ग अपनाने होंगे जो मुस्लिम आतंकवादी हिन्दुओं को मारने के लिए अपना रहे हैं ।


हमें महाराणा प्रताप व छत्रपति शिवाजी जैसे वीर योद्धाओं के उस सबक को फिर से याद करना होगा जिसके अनुसार मुस्लिम आतंकवाद को खत्म करने के लिए मुस्लिम जिहादियों को ढूंढ-ढूंढ कर उनके घर में घुस कर मारना होगा ।


हमें वीर योद्धा पृथ्वीराज राज द्वारा की गई गलती से मिले सबक को याद रखकर उस पर अमल करना होगा । अगर वीर योद्धा पृथ्वी राज कब्जे में आये उस मुस्लिम जिहादी राक्षस मुहमद गौरी को न छोड़ता तो हिन्दुओं को इतना नुकसान न उठाना पड़ता।


हिन्दुओं को गीता के इस उपदेश पर हर वक्त अमल करने की जरूरत है ।


धर्मों रक्षति रक्षितः




हम हर बार इन मुस्लिम जिहादी राक्षसों के प्रति दया दिखाने की बेवकूफी करते हैं और नुकसान उठाते हैं।


क्या आपको याद है कि जिस मुस्लिम जिहादी ने धन तेरस के दिन दिल्ली में बम्ब विस्फोट कर सैंकड़ों हिन्दुओं की जान ली । विस्फोट वाले स्थान पर बच्चों की सैंडलों के ढेर लग गए। उस स्थान पर चारों तरफ मानव के मांस के जलने की दुर्गंध फैल गई । वो मुस्लिम जिहादी एक बार पुलिस ने पकड़ कर सरकार के हवाले कर दिया था ।


उसे सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार ने पढ़ालिखा निर्दोष बताकर छोड़ दिया था ।


एक बात तो साफ और स्पष्ट है कि सारा जिहाद समर्थक सेकुलर गिरोह अपनी इतनी बेवकुफीयों की वजह से इतने हिन्दुओं का कत्ल करवाने के बावजूद कुछ सीखने को तैयार नहीं है। न मुस्लिम आतंकवादियों की हर हरकत को जायज ठहराने वाले महेश भट्ट, जावेद अखत्र, फारूकी, अब्दुल रहमान अंतुले जैसे आतंकवादियों को अलग थलग करने की किसी भी कोशिश का साथ देने को तैयार हैं ।


तो फिर कानून से इस समस्या का समाधान कैसे निकल सकता है क्यों कि अगर ये गिरोह सरकार में है तो खुद मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करेगा नहीं और अगर करना भी चाहेगा तो इसके मुस्लिम जिहादियों के समर्थक सहयोगी करने नहीं देंगे ।


अगर ये जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गठवन्धन विपक्ष में है तो सरकार को आतंकवादियों के विरूद्ध कठोर व निर्णायक कार्यवाही करने नहीं देगा । आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवाही को मुसलमानों के विरूद्ध कार्यवाही करार देकर अपल्पसंख्यकों पर हमला बताकर मुसलमानों को भड़कायेगा । सारी दुनिया में हिन्दुओं व भारत को मुस्लिम विरोधी बताकर बदनाम करेगा ।


अब इन सब हालात में सिर्फ तीन समाधान के रास्ते बचते हैं।


पहला सब शान्तिप्रिय देशभक्त लोग अपने छोटे-छोटे निजी स्वार्थ भुलाकर मिलकर सिर्फ एक बार इस तरह वोट करें कि आने वाले चुनावों में भाजपा को दो तिहाई बहुमत देकर इस आतंकवाद समर्थक गिरोह के सब सहयोगियों के उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त करवायें ताकि ये देशद्रोही सेकुलर गिरोह विपक्ष में बैठने के भी काबिल न रहे और अगर रहे तो इतनी कम संख्या में कि ये सरकार द्वारा किये जा रहे किसी भी आतंकवाद विरोधी काम में टांग न अड़ा सकें ।


अगर इसके बाद भी भाजपा इस समस्या का हल न कर पाये तो भाजपा अपने आप सेना को बुलाकर अपने राष्ट्रवादी होने का प्रमाण देकर देश की बागडोर सेना के हाथ में सौंप दे । अगर भाजपा न खुद आतंकवादियों के विरूध निर्णायक कार्यवाही करे न सता सेना को सौंपे तो जनता उसका भी आने वाले चुनाव में सेकुलर गिरोह की तरह सफाया कर किसी ज्यादा देशभक्त विकल्प को सता में लाए।


दूसरा सेना शासन अपने आप अपने हाथ में लेकर सब जिहादियों व उनके समर्थकों का सफाया अपने तरीके से करे । सब देशभक्त संगठन खुले दिल से सेना की इस कार्यवाही का सहयोग करें ।


तीसरा अगर इन में से कुछ भी न हो पाय तो फिर हर देशभक्त हिन्दू -परिवार गुरू तेगबहादुर जी के परिवार के मार्ग पर चलकर उन की शिक्षाओं को अमल में लाते हुए धर्म की रक्षा की खातिर लामबंद हो जाए और कसम उठाये कि जब तक इन मुस्लिम जिहादी राक्षसों,वांमपंथी आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों का इस अखण्ड भारत से नामोनिशान न मिट जाए तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे चाहे इसके लिए कितने भी बलिदान क्यों न देने पड़ें ।


हम ये दावे के साथ कह सकते हैं कि पहला और दूसरा समाधान सब हिन्दुओं बोले तो हिन्दू सिख ईसाई बौध जैन मुसलमान सब शान्तिप्रय देशभक्त देशवासियों के हित में है । इसलिए सब देशभक्त लोगों को मिलकर इस हल को कामयाब बनाने का अडिग निर्णय कर समस्या का समाधान निकाल लेना चाहिये ।


पर देश की परस्थितियों व इस देशद्रोही सेकुलर गिरोह की फूट डालो और राज करो के षड्यन्त्रों को देखते हुए इस समस्या का लोकतान्त्रिक हल असम्भव ही दिखता है क्योंकि आज मुसलमान इस सेकुलर गिरोह के दुशप्रचार से प्रभावित होकर हर हाल में उस दल को एक साथ वोट डालता है जो उसे सबसे ज्यादा हिन्दुविरोधी-देशविरोधी दिखता है ।


ईसाई ईसाईयत को आगे बढ़ाने वालों व धर्मांतरण की पैरवी करने वालों को वोट डालता है ।


बस एक हिन्दू है जिसका एक बढ़ा हिस्सा आज भी मुसलमानों व ईसाईयों द्वारा अपनाइ जा रही हिन्दुविरोधी वोट डालो नीति को नहीं समझ पा रहा है और अपने खून के प्यासे इस सेकुलर गिरोह को वोट डालकर अपने बच्चों का भविष्य खुद तवाह कर रहा है।


हिन्दू इस देशविरोधी-हिन्दुविरोधी नीति को धर्मनिर्पेक्षता मानकर हिन्दूविरोधियों को वोट डालकर अपनी बरबादी को खुद अपने नजदीक बुला रहा है । हिन्दू की स्थिति विलकुल उस कबूतर की तरह है जो बिल्ली को अपनी तरफ आता देखकर आंखे बंद कर यह मानने लग पड़ता है कि खतरा टल गया और बिल्ली बड़े आराम से उसका सिकार करने में सफल हो जाती है ।


सारे आखण्ड भारत में चुन-चुन कर बहाया गया व बहाया जा रहा हिन्दुओं का खून चीख-चीख कर कह रहा है कि इन मुस्लिम जिहादियों व उनके सहयोगी इस देशबिरोधी सैकुलर गिरोह का हर हमला सुनियोजित ढंग से हिन्दुओं को मार-काट कर, उनकी सभ्यता संस्कृति को तबाह कर अपने देश भारत से हिन्दुओं का नमो-निसान मिटाकर सारे देश को मुस्लिम जिहादी राक्षसों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के हवाले करने के लिए किया जा रहा है । परन्तु हिन्दू की बन्द आंख है कि खुलती ही नहीं ।


अगर सिर्फ एक बार हिन्दू इन धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे हिन्दूविरोधियों की असलियत को समझ जाए तो अपने आप इन सब गद्दारों का नामोनिशान मिट जाएगा पर दिल्ली के चुनाव परिणाम ने दिखा दिया कि हिन्दुओं का बढ़ा वर्ग अभी भी इन देशद्रोहियों की असलियत को नहीं पहचान पाया है ।उसने फिर उस दल को वोट कर दिया जिसने पोटा हटाकर व अफजल को फांसी न देकर मुस्लिम जिहादियों का हौसला बढ़ाकर शहीदों के बलिदान का अपमान कर हजारों हिन्दुओं को कत्ल करवा दिया जबकि सब मुसलमानों ने मिलकर मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन करने वाले सेकुलर गिरोह को बोट डाला ।


अतः सैनिक शासन ही इन दो में से ज्यादा सम्भव दिखता है वो भी कम से कम 20-25 वर्ष तक ।


अगर सेना अपने आप को देश की सीमांओं की रक्षा तक सीमित रखती है तो हिन्दूक्राँति ही सारी समस्या का एकमात्र सरल हल है जिसकी देश को नितांत आवश्यकता है।


हिन्दूक्राँति तभी सम्भव है जब सब देशभक्त हिन्दू संगठन एक साथ आकर, आतंकवादियों को समाप्त करने की प्रक्रिया से सबन्धित छोटे-मोटे मतभेद भुलाकर, अपने-अपने अहम भुलाकर गद्दार मिटाओ अभियान चलाकर इन देशद्रोहियों को मिटाकर भारत को इस कोढ़ से मुक्त करवायें। इस अभियान में जो भी साथ आता है उसे साथ लेकर, जो बिरोध या हमला करता है उसे मिटाकर आगे बढ़ने की जरूरत है ।


क्योंकि समाधान तो तभी सम्भव है जब हिन्दुओं का खून बहाने वालों को उनके सही मुकाम पर पहुँचाया जाए व सदियों से इतने जुल्म सहने वाले हजारों वर्षों तक अपने हिन्दू राष्ट्र की रक्षा के लिए खून बहाने वाले हिन्दुओं के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए उन्हें उनके सपनों का राम राज्य बोले तो हिन्दूराष्ट्र भारत सदियों से काबिज होकर बैठे आक्राँताओं से मुक्त मिले ।


हिन्दुओं को क्यों अपने शत्रु और मित्र की समझ नहीं हो पा रही ?


क्यों हिन्दू आतमघाती रास्ते पर आगे बढ़ रहा है ?


क्यों उसको समझ नहीं आता कि जयचन्द की इस हिन्दुविरोधी मुस्लिमपरस्त सोच ने हिन्दुओं को अपूर्णीय क्षति पहुँचाई है ?


जिहादी आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक ये सैकुलर सोच हिन्दुओं की कातिल है ।




मुस्लिम जिहादियों द्वारा 24 मार्च 2003 को हिन्दुओं का नरसंहार


वैसे भी ये आत्मघाती सोच सैंकड़ों वर्षों की गुलामी का परिणाम है अब हमें अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए इस आत्मघाती गुलामी की सोच से बाहर निकलना है। न केवल खुद को बचाना है बल्कि इस देशविरोधी सैकुलर गिरोह के सहयोग से मुस्लिम जिहादियों के हाथों कत्ल हो रहे अपने हिन्दू भाईयों भी को बचाना है। इनकी रक्षा में ही हमारी रक्षा है क्योंकि जिस तरह आज बो मारे जा रहे हैं अगर आज हम संगठित होकर एक साथ मिलकर इन मुस्लिम जिहादियों से न टकराये तो बो दिन दूर नहीं जब उसी तरह हम भी इन राक्षसों द्वारा इन धर्मनिर्पेक्षताबादी जयचन्दों के सहयोग से मारे जायेंगे ।


अगर अब भी आपको लगता है कि हिन्दुओं का कत्ल नहीं हो रहा है, ये हमले मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर नहीं किये जा रहे, हिन्दुओं का नमो-निसान मिटाने के लिए मुसलमानों द्वारा हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान नहीं चलाया जा रहा । क्योंकि ये देशद्रोही जिहाद समर्थक सैकुलर गिरोह आपको इस सच्चाई से दूर रखने के लिए हिन्दुविरोधी मीडिया का सहारा लेकर यही तो प्रचारित करवाता है ।


तो जरा ये कश्मीर घाटी से हिन्दुओं को मार काट कर भगाने के लिए चलाए गय सफल अभियान के बाद मुसलमानों द्वारा जम्मू के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में चलाए जा रहे हिन्दू मिटाओ-हिन्दू भगाओ अभियान के दौरान हलाल किये जा रहे हिन्दुओं का विबरण देखो और खुद सोचो कि किस तरह मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं का कत्लेआम इन धर्मनिर्पेक्षतावादियों का सरंक्षण पाकर बेरोक टोक किया जो आज भी जारी है !




अलकायदा की स्थापना 1985 में होने के बाद कश्मीर में अल्लाह टायगरस नामक जिहादी संगठन ने























1986 आते-आते वहां की मुस्लिमपरस्त जिहादी आतंकवाद समर्थक सैकुलर सरकार के रहमोकर्म व सहयोग से अपने आपको इतना ताकतवर बना लिया कि ये हिन्दुओं के विरूद्ध खुलेआम जहर उगलने लगा ।


जिसके परिणांस्वरूप हिन्दुओं पर पहला हमला 1986 मे अन्नतनाग में हुआ । दिसम्बर 1989 में जोगिन्दर नाथ जी का नाम अन्य तीन अध्यापकों के साथ नोटिस बोर्ड पर चिपकाकर उसे घाटी छोड़ने की धमकी दी गई । ये तीनों राधाकृष्ण स्कूल मे पढ़ाते थे । धमकाने का सिलसिला तब तक जारी रहा जब तक जून 1989 में जोगिन्दर जी वहां से भाग नहीं गए ।


हमें यहां पर यह ध्यान में रखना होगा कि हिन्दु मिटाओ हिन्दु भगाओ अभियान चलाने से पहले 1984-86 के वीच में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुस्लिम जिहादीयों को भारतीय कश्मीर में वसाया गया और घाटी में जनसंख्या संतुलन मुस्लिम जिहादियों के पक्ष में वनाकर हिन्दुओं पर हमले शुरू करवाय गए। ये सब पाकिस्तान के इसारे पर इस सेकुलर गिरोह की सरकारों ने किया।


2 फरवरी 1990 को सतीश टिक्कु जी जोकि एक समाजिक कार्यकर्ता व आम लोगों का नेता था, को जिहादियों ने शहीद कर दिया ।


23 फरवरी को अशोक जी, जो कृषि विभाग में कर्मचारी थे, की टाँगो में गोली मारकर उन्हें घंटों तड़पाकर बाद में सिर में गोली मारकर उनका कत्ल कर दिया गया ।


एक सपताह बाद इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा नवीन सपरु का कत्ल कर दिया गया ।


27 फरवरी को तेज किशन को इन जिहादियों ने घर से उठा लिया और तरह-तरह की यातनांयें देने के बाद उसका कत्ल कर उसे बड़गाम में पेड़ पर लटका दिया ।


19 मार्च को इखवान-अल-मुसलमीन नामक संगठन के जिहादियों ने बी के गंजु जी जो टैलीकाम इंजनियर का काम करते थे, को घर में घुस कर पड़ोसी मुसलमानों की सहायता से मारा ।


उसके बाद राज्य सूचना विभाग में सहायक उपदेशक पी एन हांडा का कत्ल किया गया ।


70 वर्षीय स्वरानन्द और उनके 27 वर्षीय बेटे बीरेन्दर को मुस्लिम जिहादी घर से उठाकर अपने कैंप में ले गए । वहां उनकी पहले आंखे निकाली गईं ,अंगुलियां काटी गईं फिर उनकी हत्या कर दी गई ।


मई में बारामुला में सतीन्दर कुमार और स्वरूपनाथ को यातनांयें देने के बाद कत्ल कर दिया गया ।


भुसन लाल कौल का आंखे निकालने के बाद जिहादियों द्वारा कत्ल कर दिया गया ।


के एल गंजु जो सोपोर कृषि विश्वविद्याल्य में प्रध्यापक का काम करते थे ,को उनके घर से पत्नी व भतीजे सहित उठाकर झेलम नदी के किनारे एक मस्जिद में ले जाया गया । वहां पर गंजु जी का यातनांयें देने के बाद कत्ल कर दिया गया । भतीजे को नितम्बों में गोली मारकर झेलम में फैंक दिया गया । पत्नी का बलात्कार करने के बाद कत्ल कर दिया गया ।


सरलाभट्ट जी जो श्रीनगर में सेर ए कश्मीर चिकित्सा कालेज में नर्स थी जेकेएलएफ के जिहादियों ने हासटल से उठाकर कई बार बलात्कार करने बाद कत्ल कर दिया । क्योंकि उसे मुस्लिम जिहादियों और वहां काम करने वाले डाक्टरों के बीच के सम्बन्धों का पता चल चुका था ।


मई में सोपियां श्रीनगर में बृजलाल उनकी पत्नी रत्ना व बहन सुनीता को मुस्लिम जिहादियों ने अगवा कर लिया । बृज लाल जी को कत्ल कर दिया गया । महिलाओं का बलात्कार करने के बाद उन्हें जीप के पीछे बाँध कर प्रताड़ित करने के बाद उनका कत्ल कर दिया गया ।


मुस्लिम जिहादियों द्वारा प्रशासन में बैठे अपने आतंकवादी साथीयों के सहयोग से हिन्दुओं पर अत्याचारें का सिलसिला बेरोकटोक जारी था जिसमें जान-माल के साथ-साथ हिन्दुओं की मां-बहन–बेटी भी सुरक्षित नहीं थी । जून आते-आते सैंकड़ों हिन्दुओं का कत्ल किया जा चुका था ।



अल्लाह टायगर्स व जेकेएलएफ के मुस्लिम जिहादियों द्वारा 1990 में हलाल किय गए हिन्दू (शवों के साथ छेड़छाड़ पर ध्यान दें)


दर्जनों महिलाओं की इजत को तार-तार किया जा चुका था । मस्जिदों व उर्दु प्रैस के माध्यम से मुस्लिम जिहाद का प्रचार-प्रसार जोरों पर था । ये जिहाद कश्मीर के साथ-साथ डोडा में भी पांव पसार चुका था। हिन्दुओं में प्रशासन व जिहादी आतंकवादियों के बीच गठजोड़ से दहशत फैल चुकी थी । प्रशासन का ध्यान हिन्दुओं की रक्षा के बजाए मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर किये जा रहे अत्याचारों व हिन्दुओं के नरसंहारों को छुपाने पर ज्यादा था । परिणामस्वरूप कश्मीर घाटी से हिन्दुओं का पलायन शुरू हो चुका था । जून तक 50,000 से अधिक हिन्दू परिवार घाटी छोड़ कर जम्मू व देश के अन्य हिस्सों में शरण लेने को मजबूर हो चुके थे ।




1990 में मुस्लिम जिहादियों द्वारा उजाड़े गए हिन्दुओं का शर्णार्थी शिविर


पहली अगस्त 1993 को जम्मू में डोडा के भदरबाह क्षेत्र के सारथल में बस रोकर उसमें से हिन्दुओं को छांट कर 17 हिन्दुओं का मुस्लिम जिहादियों द्वारा नरसंहार किया गया ।


14 अगस्त 1993 को किस्तबाड़ डोडा जिले में मुस्लिम जिहादियों ने बस रोककर उसमें से हिन्दुओं को अलग कर 15 हिन्दुओं का कत्ल कर दिया व हिन्दुओं के साथ सफर कर रहे मुसलमानों को जाने दिया।


5 जनवरी 1996 में डोडा के बारसला गांव में पड़ोसी मुस्लिम जिहादियों द्वारा 16 हिन्दुओं का कत्ल कर दिया गया


12 जनवरी 1996 डोडा के भदरबाह में मुसलमानों द्वारा 12 हिन्दुओं का कत्ल


6 मई 1996 डोडा के सुम्बर रामबन तहसील में 17 हिन्दुओं का मुस्लिम जिहादियों द्वारा कत्ल


7-8 जून को डोडा के कलमाड़ी गांव में मुसलमानों द्वारा 9 हिन्दुओं का कत्ल


1997


25 जनवरी को डोडा जिला के सम्बर क्षेत्र में मुसलमानों द्वारा 17 हिन्दुओं का कत्ल


26 जनवरी को बनधामा श्रीनगर में 25 हिन्दुओं का कत्ल मुस्लिम जिहादियों द्वारा किया गया ।


21 मार्च 1997 को श्रीनगर के दक्षिण में 20 किलोमीटर दूर संग्रामपुर में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 7 हिन्दुओं को घर से निकाल कर कत्ल कर दिया गया


7 अप्रैल को संग्रामपुर में 7 हिन्दुओं का कत्ल


15 जून को गूल से रामबन जा रही बस से मुस्लिम जिहादियों द्वारा 3 हिन्दू यात्रियों को उतार कर गोली मार दी गई ।


24 जून को जम्मू के रजौरी के स्वारी में 8 हिन्दुओं का कत्ल मुसलमानों द्वारा


24 सितम्बर को स्वारी में ही 7 हिन्दुओं का कत्ल पड़ोसी मुस्लिम भाईयों द्वारा


आगे बढ़ने से पहले हम आपको ये बताना जरूरी समझते हैं कि जो भी हिन्दू मारे गए या मारे जा रहे हैं उन्हें मारने वाले सबके सब विदेशी नहीं हैं। इन्हें मारने वाले स्थानीय मुसलमान ही हैं क्योंकि पाकिस्तान से आये मुसलमान 1-2-3 तीन की संख्या में छुपते-छुपाते स्वचालित हथियारों से हिन्दुओं का कत्ल तो कर सकते हैं परन्तु 15-20-40-50 की संख्या में मिलकर हिन्दुओं को हलाल करना,कत्ल से पहले अंगुलियां काटना, उनकी मां-बहन बेटी की इज्जत से खिलवाड़ करना उनके गुप्तांगो पर प्रहार करना,कत्ल से पहले हिन्दुओं के अंग-भंग करना ,आंख निकालना,नाखुन खींचना, बाल नोचना,जिन्दा जलाना,चमड़ी खींचना खासकर महिलाओं के दूध पिलाने वाले अंगो से,गाड़ी के पीछे बांधकर घसीटते हुए तड़पा-तड़पा कर मारना । ये सब ऐसे कार्य हैं जो स्थानीय मुसलमानों व सरकार के सहयोग व भागीदारी के बिना सम्भव ही नहीं हो सकते हैं । क्योंकि अगर स्थानीय मुसलमान व सरकार इस सब में शामिल न होते तो किसी विदेशी मुस्लिम जिहादी को रहने व छुपने का ठिकाना न मिलता।


ये बात बिल्कुल सपष्ट है कि हिन्दुओं को कत्ल करने में न केवल जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों का सहयोग व भागीदारी रही है बल्कि देश के केरल जैसे अन्य राज्यों के मुसलमानों ने भी इस हिन्दू मिटाओ-हिन्दू भगाओ अभियान में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया है स्थानीय सहयोग की पुष्टि इन जिहादी हमलों में जिन्दा बचे हिन्दुओं व बाकी देश के मुसलमानों के सहयोग की पुष्टि सुरक्षा बलों द्वारा की गई है । सरकारी सहयोग की पुष्टि करने के हजारों प्रमाण मौजूद हैं ।


अगर जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की किसी पाकिस्तानी मुस्लिम जिहादी से शादी कर लेती है तो उस पाकिस्तानी को जम्मू कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है परन्तु अगर जम्मू-कश्मीर की वही लड़की भारत के किसी नागरिक से शादी करती है तो उसकी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता समाप्त हो जाती है ।


हिन्दुओं के कत्ल के आरोपियों को दोषी सिद्ध करने के लिए सरकार अदालत में जरूरी साक्ष्य पेश नहीं करती है। निचली अदालतों द्वारा छोड़े गए दोषियों के विरूद्ध उच्च न्यायालय में अपील तक नहीं की जाती है। ये सब उसी सैकुलर गिरोह व सेकुलर गिरोह की सरकारों द्वारा किया जाता है जो गुजरात के उच्च न्यायालय द्वारा दिय गये हर फैसले को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देकर महाराष्ट्र स्थानान्त्रित करवाता है।


कहीं जम्मू-कश्मीर में देशभक्त लोगों की सरकार न बन जाये इसके लिये गद्दारों से भरी पड़ी कश्मीर घाटी में विधानसभा सीटों की संख्या देशभक्तों से भरे पड़े जम्मू से अधिक है जबकि कश्मीर घाटी में आबादी और क्षेत्रफल जम्मू से कम है ।


सरकार सुरक्षा बलों द्वारा मारे गये मुस्लिम जिहादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान को चलाये रखने के लिए प्रेरित करती है ।………


कुल मिलाकर मुस्लिम जिहादियों द्वारा चलाए जा रहे हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान की सफलता के पीछे जम्मू-कश्मीर की देशविरोधी सैकुलर सरकारों का योगदान पाकिस्तान से कहीं ज्यादा है क्योंकि पाकिस्तान की स्थापना का आधार ही मुस्लिम जिहाद है अतः मुस्लिम जिहादी आतंकवाद को आगे बढ़ाना उसकी विदेश नीति का प्रमुख हिस्सा होना उस इस्लाम की विस्तारवादी नीति का ही अंग है जिसका हमला भारत 638 ई. से झेलता आ रहा है ।


भारत के नागरिकों के जान-माल की रक्षा करना भारत सरकार का दायित्व है न कि पाकिस्तान का । वैसे भी पाकिस्तान बनवाने वाला यही देशद्रोही सैकुलर गिरोह है जिसने सैंकड़ों वर्षों तक मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर ढाये गये असंख्य जुल्मों से कोई सबक न लेते हुए 1947 में मुसलमानों के लिये अलग देश बनवा देने के बावजूद मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने के बजाए भारत में रख लिया। वो ही मुसलमान आज मुस्लिम जिहादियों को हर तरह का समर्थन व सहयोग देकर आज हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाने पर तुले हुए हैं।


1998


25 जनवरी शाम को दो दर्जन मुसलमान श्रीनगर से 30 कि मी दूर गांव वनधामा में आय चाय पी और आधी रात के बाद गांव में 23 हिन्दुओं का कत्ल कर चले गए । सिर्फ विनोद कुमार बच पाया । जिसने अपने मां बहनों रिश्तेदारों को आंसुओं से भरी आंखों से देखा । वहां चारों तरफ खून ही खून बिखरा पड़ा था ।




17 अप्रैल को उधमपुर के प्रानकोट व धाकीकोट मे मुस्लिम जिहादियों द्वारा 29 हिन्दुओं का कत्ल किया गया । जिसके बाद इन गांव के लगभग 1000 लोग घर से भाग कर अस्थाई शिवरों में रहने लगे ।


18 अप्रैल को सुरनकोट पुँछ में मुसलमानों द्वारा 5 हिन्दुओं का कत्ल


6 मई को ग्राम रक्षा स्मिति के 11 सदस्यों का कत्ल


19 जून को डोडा के छपनारी में 25 हिन्दुओं का कत्ल मुस्लिम जिहादियों द्वारा शादी समारोह पर हमला कर किया गया ।


27 जून को डोडा के किस्तबाड़ में 20 हिन्दुओं का कत्ल


27 जुलाई को सवाचलित हथियारों से लैस मुस्लिम जिहादियों ने थकारी व सरवान गांव में 16 हिन्दुओं का कत्ल किया ।


8 अगस्त को हिमाचल प्रदेश में चम्बा और डोडा की सीमा पर कालाबन में मुसलमानों द्वारा 35 हिन्दुओं का कत्ल


1999


13 फरवरी को उधमपुर में मुसलमानों द्वारा 5 हिन्दुओं का कत्ल


19 फरवरी को मुसलमानों की इसी गैंग ने रजौरी में 19 व उधमपुर में 4 हिन्दुओं का कत्ल


24 जून को मुस्लिम जिहादियों द्वारा अन्नतनाग के सान्थु गांव में 12 बिहारी हिन्दू मजदूरों का कत्ल


1 जुलाई को मेन्धार पुँछ में 9 हिन्दुओं का मुसलमानों द्वारा कत्ल


15 जुलाई को डोडा के थाथरी गांव में मुसलमानों द्वारा 15 हिन्दुओं का कत्ल


19 जुलाई को डोडा के लायता में 15 हिन्दुओं का मुसलमानों द्वारा कत्ल


2000


28 फरवरी को अन्नतनाग में काजीकुणड के पास 5 हिन्दू चालकों का मुसलमानों द्वारा कत्ल


28 फरवरी को इसी जगह पर 5 सिख चालकों का इन्हीं मुसलमानो द्वारा कत्ल


20 मार्च को जम्मू के छटीसिंहपुरा गाँव में मुसलमानों द्वारा 35 सिखों का कत्ल किया गया । यहां 40-50 जिहादियों ने एक साथ मिलकर सिखों पर हमला कर पुरूषों को अलग कर गोली मार दी ।





1अगस्त को पहलगांव में अमरनाथयात्रियों सहित सहित 31 हिन्दुओं का मुसल्मि आतंकवादियों द्वारा कत्ल कर दिया गया ।


1अगस्त को ही अन्नतनाग के ही काजीकुण्ड और अछाबल में 27 हिन्दू मजदूरों का कत्ल ।


2 अगस्त को कुपबाड़ा में मुसलमानों द्वारा 7 हिन्दुओं का कत्ल


इसी दिन डोडा में 12 हिन्दुओं का कत्ल


इसी दिन डोडा के मरबाह में 8 हिन्दुओं का कत्ल


24 नवम्बर को किस्तबाड़ में 5 हिन्दुओं का कत्ल


2001


3 फरवरी को 8 सिखों का कत्ल माहजूरनगर श्रीनगर में मुसलमानों द्वारा किया गया ।


11 फरवरी को रजौरी के कोट चरबाल में 15 गुजरों का कत्ल किया गया जिसमें छोटे-छोटे बच्चों का भी कत्ल कर दिया गया ।इनका अपराध यह था कि ये जिहादियों के कहे अनुसार हिन्दुओं के शत्रु नहीं बने ।


मार्च 17 को अथोली डोडा में 8 हिन्दुओं का कत्ल मुसलमानों द्वारा किया गया ।


मई 9-10 को डोडा के पदर किस्तबाड़ में 8 हिन्दुओं को गला काट कर मुसलमानों द्वारा हलाल कर दिया गया । सब के सब शव क्षत विक्षत थे ।


21 जुलाई को बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा पर हमले में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 13 हिन्दुओं का कत्ल किया गया । इस हमले मे 15 हिन्दू घायल हुए । जिहादियों ने शेषनाग में बारूदी शुंरगों से विस्फोट कर सैनिकों को गोलीबारी में उलझाकर पवित्र गुफा पर हमला कर भोले नाथ के भक्तों का कत्ल किया ।


21 जुलाई को किस्तबड़ डोडा में 20 हिन्दुओं को मुसलमानों द्वारा मारा गया


22 जुलाई को डोडा के चिरगी व तागूड में 15 हिन्दुओं को उनके घरों से निकाल कर मुसलमानों ने कत्ल किया


4 अगस्त को डोडा के सरोतीदार में मुसलमानों द्वारा 15 हिन्दुओं का कत्ल किया गया ।


6 अगस्त को स्वचालित हथियारों से लैस तीन मुस्लिम जिहादियों ने जम्मू रेलवेस्टेशन पर हमलाकर 11 लोगों का कत्ल कर दिया व 20 इस हमले में घायल हुए ।


2002


1 जनवरी को पूँछ के मगनार गाँव में 6 हिन्दुओं का कत्ल किया गया


7 जनवरी को जम्मू के रामसूर क्षेत्र में 17 व बनिहाल के सोनवे-पोगल क्षेत्र में 6 हिन्दुओं का कत्ल किया गया


17 फरवरी को रजौरी के भामवल-नेरल गाँव में मुसलमानों द्वारा 8 हिन्दुओं का कत्ल किया गया ।


14 मई को जम्मू-पठानकोट राजमार्ग पर कालुचक में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 33 सैनिकों व सैनिकों को परिवारों के लोगों का कत्ल किया गया जिसमे 6 बस यात्री भी शामिल थे ।


13 जुलाई को राजीव नगर(क्वासीम नगर) जम्मू में 28 हिन्दुओं का कत्ल किया गया । मरने वालों में 3 साल का बच्चा भी था ।


30 जुलाई को जिहादियों ने अमरनाथ यात्रियों को वापिस ला रही कैब को अन्नतनाग में ग्रेनेड हमले से उड़ा दिया ।


6 अगस्त को पहलगांव के पास ननवाव में जिहादियों द्वारा भारी सुरक्षा व्यवस्था में चल रहे आधार शिविर मे अमरनाथ यात्रियों पर हमला कर 9 हिन्दुओं को कत्ल किया गया व 33 को घायल कर दिया ।


29 अगस्त को डोडा और रजौरी में 10 हिन्दुओं का कत्ल किया गया।


24 नवम्बर को जम्मू में ऐतिहासिक रघुनाथ मन्दिर पर हमला कर 14 हिन्दुओं का कत्ल किया गया व 53 हिन्दू इस हमले मे घायल हुए


19 दिसम्बर को जिहादियों ने रजौरी के थानामण्डी क्षेत्र मे तीन लड़कियों को बुरका नहीं पहनने की वजह से गोली मार दी ।बुरका पहनाने पर ये मुस्लिम जेहादी इसलिए भी ज्यादा जोर देते हैं क्योंकि बुरके को ये आतंकवादी सुरक्षावलों को चकमा देकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए उपयोग करते हैं।


2003


24 मार्च को सोपियां के पास नदीमार्ग गांव में मुस्लिम जिहादियों द्वार 24 हिन्दुओं का कत्ल कर दिया गया ।





7 जुलाई को नौसेरा में 5 हिन्दुओं का कत्ल किया गया ।


2004


5 अप्रैल को अन्नतनाग जिले के पहलाम में 7 हिन्दुओं का कत्ल कर दिया गया ।


12 जून को पहलगाम में ही 5 हिन्दूयात्रियों का कत्ल इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा किया गया ।


2006


30 अप्रैल को डोडा के पंजदोबी गाँव में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 19 हिन्दुओं का कत्ल


1मई को उधमपुर के बसन्तपुर क्षेत्र में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 13 हिन्दुओं का कत्ल ।


23 मई को श्रीनगर में ग्रेनेड हमले में 7 हिन्दू यात्रियों का कत्ल


25 मई को श्रीनगर में ही 3 हिन्दू यात्रियों का ग्रेनेड हमला कर कत्ल किया गया


फिर 31 मई को ही ग्रेनेड हमला कर 21 हिन्दू घायल किय गए


12 जून को फिर ग्रेनेड फैंक कर 1 यात्री का कत्ल किया गया व 31 घायल किये गए ।


12 जून को ही मुस्लिम जिहादियों द्वारा अन्नतनाग में 8 हिन्दू मजदूरों का कत्ल किया गया व 5 घायल किये गए ।


21 जून को गंदरबल श्रीनगर में मुस्लिम जिहादियों ने ग्रेनेड हमला कर 5 अमरनाथ यात्रियों को घायल किया ।


11 जुलाई को श्रीनगर में ही अमरनाथ तीर्थ यात्रियों को निशाना बनाकर किये गए श्रृंखलाबद्ध ग्रेनेड हमलें में 8 लोग मारे गए व 41 घायल हुए ।


12 जुलाई को 7 हिन्दू तीर्थ यात्री श्रीनहर ग्रेनेड हमलों में घायल किये गए ।


हिन्दुओं पर किस हद तक अपने भारत में ज्यादतियां हुई हैं उन्हें भावुक ढंग से लिख पाना हमारे जैसे गणित के विद्यार्थी के लिए सम्भव नहीं । हमारे लिये यह भी सम्भव नहीं कि हम हिन्दुओं पर हुए हर अत्याचार का पूरा ब्यौरा जुटा सकें लेकिन फिर भी जो थोड़े से आंकड़ें हम प्राप्त कर सके वो आपके सामने रखकर हमने आपको सिर्फ यह समझाने का प्रयत्न किया है कि ये जो मुस्लिम जिहादियों और धर्मनिर्पेक्षतावादियों का गिरोह है वो धरमनिर्पेक्षता के बहाने हिन्दुओं को तबाह और बरबाद करने में जुटा है।


इस गिरोह से जुड़े एक-एक व्यक्ति के हाथ देशभक्त हिन्दुओं के खून से रंगे हुए हैं ये गिरोह हर उस व्यक्ति का शत्रु है जो भारतीय संस्कृति को अपनी संस्कृति समझता है जो देश को अपनी मां समझता है जो देश में जाति क्षेत्र संप्रदाय विहीन कानून व्यवस्था का समर्थन करता है जो देश में मानव मुल्यों का समर्थन करता है कुल मिलाकर ये राक्षसी गिरोह हर उस भारतीय का शत्रु है जो देशभक्त है ।


इस गिरोह को न सच्चे हिन्दू की चिन्ता है ,न सच्चे मुसलमान की, न सच्चे सिख ईसाई बौध या जैन की इसे चिन्ता है ,तो सिर्फ जयचन्दों, जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की जिनके टुकड़ों व वोटों के आधार पर इस देशद्रोही गिरोह की राजनीति आगे बढ़ती है इस गिरोह का एक ही उदेशय है जो ये पंक्तियां स्पष्ट करती हैं


न हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा


तु इन्सान की औलाद है


सैकुलर शैतान बनेगा




इन धर्मनिर्पेक्षतावादियों का बढ़पन देखो कितने प्यार से अपने पाले हुए मुस्लिम जिहादियों के हाथों मारे गए




हिन्दुओं का दाहसंस्कार करने की इजाजत हिन्दुओं को दे रहे हैं वो भी तब अगर गलती से उस क्षेत्र में जिहादियों से कोई हिन्दू बच जाए तो ।


कौन कहता है इनमें और राक्षस औरंगजेब में कोई फर्क नहीं फर्क है ये धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदार हिन्दुओं को खुद नहीं मारते सिर्फ मारने वाले मुस्लिम जिहादियों के अनुकूल बाताबरण बनाते हैं, उनको अपना भाई कहर उनका हौसला बढ़ाते हैं, उनको कहीं सजा न हो जाए इसलिए पोटा जैसे सख्त कानून हटाते हैं, सजा हो भी जाए तो सिर्फ फाईल ही तो दबाते हैं सारे देश के हिन्दुओं से इन मुस्लिम जिहादियों की करतूतों को छुपाने के लिए जिहादियों का कोई धर्म नहीं होता ऐसा फरमाते हैं कोई न माने तो अपनी बात पर यकीन दिलवाने के लिए 10-11 हिन्दुओं को जबरदस्ती जेल में डाल कर हिन्दू-आतंकवादी हिन्दू-आतंकवादी चिल्लाते हैं कहीं हिन्दू छूट न जाँयें इसलिए जबरदस्ती मकोका भी लगाते हैं ।


धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में हिन्दुओं के खून से लत-पथ अपने जिहाद व धर्मांतरण समर्थक चेहरे को छुपाते हैं। मुस्लिम व ईसाई देशों से पैसा और समर्थन हासिल करने के लिए राष्ट्रबाद-सर्बधर्म सम्भाव से प्रेरित हिन्दुओं व उनके संगठनों को अक्सर सांप्रदायिक व आंतकबादी कहकर उनपर हमला बोलते हैं। हिन्दू संगठनों द्वारा हिन्दुओं पर हो रहे हमलों का बिरोध करने पर ये देशद्रोही गिरोह प्रतिबंध की मांग उठाकर, दबाब बनाकर अपने हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान को आगे बढ़ाता है ।


जागो हिन्दू पहचानों इन देश के गद्दारों को, हिन्दुओं के कातिलों को मुस्लिम जिहादियों और धर्मांतरण के ठेकेदारों को । देखो भाई जो कुछ आपने ऊपर के पन्नों में पढ़ा और देखा वो सब आपके साथ न हो इसका अभी से प्रबन्ध कर लो संगठित हो जाओ किसी भी देशभक्त संगठन से जुड़ जाओ कोई अच्छा नहीं लगता है तो नया संगठन बनाओ वरना बहुत देर हो जाएगी ।


कहा भी गया है घर में आग लगने पर कुआं खोदने का क्या काम


काम मुशकिल है असम्भव नहीं। सिर्फ जरूरत है तो जिहादियों और उनके ठेकेदारों को पहचाने की । वो किस संप्रदाय, दल या क्षेत्र से है ये सब भूल जाओ सिर्फ इतना ख्याल रखो कि जो भी इन मुस्लिम जिहादियों-आंतकवादियों-कातिलों को बचाता है, बचाने की कोशिश करता है, बचाने के बहाने बनाता है ,हिन्दुओं के कत्ल को जायज ठहराता है वो ही सब हिन्दुओं का कातिल है और कातिल को जिन्दा छोड़ना मानवता का अपमान है ।


उठो हमारे प्यारे लाचार हिन्दूओ छोड़ो ये सब झूठी शांति के दिलासे और संगठित होकर टूट पड़ों इस जिहादी राक्षस पर वरना ये जिहादी राक्षस हर हिन्दूघर को तबाह और बर्बाद कर देगा ।


तड़प-तड़प कर अपमानित होकर निहत्था होकर मरने से बेहतर है एक बार सिर उठाकर संगठित होकर शत्रु से दो-दो हाथ कर लेना वरना जरा सोचो उन बच्चों के बारे में जिन बच्चों ने अपने मां-बाप को अपने सामने कत्ल होते देखा उन भाईयों के बारे में जिन्होंने इन जिहादियों के हाथों अपनी बहन को अपमानित होते देखा सोचो उस पति के बारे मे जिसने अपनी पत्नी का इन जिहादियों के हाथों बलात्कार के बाद कत्ल होते देखा











सोचो उन माता-पिता के बारे में जिनके सामने उनके दूध पीते बच्चे इन जिहादियों ने हलाल कर डाले




और सोचो मुस्लिम जिहादियों के भाईयों इन धर्मनिर्पेक्षतावादियों के इस सेकुलर गिरोह के बारे में जिसने इन कातिल जिहादियों को बचाने के लिए सब नियम कमजोर कर डाले ।























July, 2010

ये कौन हैं जो आतंकवादी मुसलमानों व मुसलिम संगठनों को निर्दोश और निर्दोश हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए एक के बाद एक षडयन्त्र रचे जा रहे हैं?

 

ये कौन हैं जो आतंकवादी मुसलमानों व मुसलिम संगठनों को निर्दोश और निर्दोश हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए एक के बाद एक षडयन्त्र रचे जा रहे हैं?

 

 

हम आपके सामने कुछ ऐसे तथ्य रखने जा रहे हैं जो आपको सायद उस हकीकत का सामना करवा सकें जिस हकीकत का सामना देशभक्त भारतीय सेना,हिन्दू व हिन्दू संगठन कर रहे हैं।


अगर हम भारत को आज वैचारिक व राजनीतिक आधार पर समझना चाहें तो कुल मिलाकर दो विचारधारायें उभर कर सामने आती हैं।


एक विचारधारा है सर्वधर्मसव्भाव व सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में विश्वास रखने वाली भारतसमर्थक हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा व दूसरी विचारधारा है भारतविरेधी-हिन्दूविरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादी विचारधारा मतलब सैकुलर गिरोह की विचारधारा।


हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा भारत को सांस्कृतिक समानता के आधार पर एकजुट कर अलगाववादियों को अलग-अलग कर भारत को आगे ले जाना चाहती है जबकि सेकुलर गिरोह की विचराधारा भारत को धर्मविहीन-हिन्दूविहीन कर धर्मनिर्पक्षता के नाम पर भारत को इसलामी व ईसाई टुकड़ों में विभाजित कर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट कर आगे और खण्ड-खण्ड करने में विश्वास रखती है।


हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा को आगे बढ़ाने का माध्यम है भारत को जोड़ने वाली सांसकृतिक कड़ियों पर जोर देकर हिन्दूएकता को प्रवल कर भारतीयों को संगठित करना जबकि सेकुलर गिरोह का जोर है हिन्दुओं को जात-पात के आधार लड़वाकर हिन्दू समाज को और विभाजित कर मुसलिम व इसाई आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारतीयों को आपस में लड़वाकर भारत के शत्रुओं को ताकतवर बनाना।


आज भारत के अधिकतर संचार साधनों पर सेकुलर गिरोह की पकड़ मजबूत होने के कारण देश में एक ऐसा महौल बना दिया गया है जिसमें हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा देशहित में कही गई या की गई हर बात को इस तरह से पेश किया जाता है मानों हिन्दूत्वनिष्ठ संगठन व भारतीय सेना ही देश की सब समस्याओं की जड़ है जबकि सच्चाई यह है कि भारत विरोधी पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादियों, चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों व रोम समर्थक ईसाई आतंकवादियों ने देश के विभिन्न हिस्सों में देसभक्तों का जीना दुशवार किया हुआ है।


मिडीया की सहायता से सेकुलर गिरोह भारतविरोधी आतंकवादियों द्वारा हिन्दूओं व देश पर किए गए हर हमले को या तो दबाने की कोशिश करता है या फिर आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले का दोश एक योजना के तहत देशभक्त भारतीय सेना, हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर मढ़ने की कोशिश की जाती है।


पिछले कुछ दिनों से ऐसे प्रमाण मिल रहे हैं कि सेकुलर गिरोह ने अपने देशविरोधी-हिन्दूविरोधी अभियानों की सफलता से उतसाहित होकर अब सीधे देश के सुरक्षाकव्च मतलब भारतीय सेना पर हमले तेज कर सैनिकों को बदनाम करना शुरू कर दिया है।


हमारा मानना है कि झूठ के पाँव नहीं होते झूठ चाहे कितने भी जोर से क्यों न कहा जाए अन्त में तो झूठ व पाप को तो हारना ही है क्योंकि प्रकृति का विधान ही ऐसा है जिसमें जीत तो सत्य और धर्म की ही होती है।


प्रकृति के इसी विधान के अनुरूप पापिओं व अधर्मियों के सेकुलर गिरोह द्वारा देसभक्त हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के वारे में फैलाए जा रहे झूठों का एक के एक पर्दाफास होता जा रहा है।




सेकलर गिरोह का झूठ-चर्चों पर हमले हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों ने किए थे...


वर्ष 2000 में गुजरात व केन्द्र में BJP की सरकार थी । उन्हीं दिनों गुजरात, उड़ीसा, आन्ध्रप्रदेश व कर्नाटक के कई चर्चों में एक के वाद एक बमबलास्ट हुए। सेकुलर गिरोह ने न आब देखा न ताब बस सीधे शोर मचा दिया कि संघ परिवार मतलब हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों ने अल्पसंख्यकों मतलब ईसाईयों और मुसलमानों को मिटाने के अपने अभियान को अंजाम देना शुरू कर दिया है।


देश के हर समाचार चैनल व समाचार पत्र ने मनघड़ंत कहानियां बनाकर हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम कर सारे संसार में भारत की छवि को धूमिल किया। हिन्दूओं को कातिल और अत्याचारी के रूप में पेश किया। संघपरिवार व हिन्दू संगठनों ने लाख कहा कि इन हमलों से उनका कोइ लेना–देना नहीं लेकिन सेकुलर गिरोह ने एक न सुनी बस शोर मचा दिया हिन्दू व हिन्दूओं के संगठन कातिल हैं अत्याचारी है ईसाईयों का नरसंहार कर रहे हैं। विदेशों से भी भारत सरकार को हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर नकेल कश कर अलपसंख्यकों की रक्षा करने के आदेश मिलने लगे ।चारों तरफ हाहाकार मचा दी गई।


तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको चौंका दिया।

आन्ध्रप्रदेश में दीनदार अन्जुमन के कुछ लोग गिरफ्तार किए गए जिन्होंने ने ये कबूल किया कि चर्चों में विस्फोट मुसलिम आतंकवादियों ने किए हैं ।क्योंकि चन्द्बाबाबू नायडू खुद सेकुलर गिरोह का हिस्सा थे इसलिए पकड़ें गए लोगों के कबूलनामे पर प्रश्न उठाना मुस्किल था फिर भी सेकुलर गिरोह ने अपनी योजना अनुशार हिन्दूओं और हिन्दू संगठनों को टारगेट करना जारी रखा।


सेकुलर गिरोह के सारे दुशप्रचार के बाद माननीय न्यायालय का ये फैसला पढ़ो....


A special court, hearing cases related to serial bomb blasts in churches in Karnataka, Andhra Pradesh, Maharashtra and Goa in 2000, has convicted 23 people belonging to Deendar Channabasaveshwara Anjuman group. Of the 27 accused who were tried, four were acquitted. Special Court Judge SM Shivana Gowdar


who convicted the 23 in Bangalore on Friday, is yet to pronounce the quantum of punishment in the case which has been adjourned till December 3.




BANGALORE, India, December 3, 2008--A court in southern India has handed death sentences to 11 people convicted of bombing churches in three states in 2000




In addition to the death sentences, the court in Bangalore, capital of Karnataka state, 2,060 kilometers south of New Delhi, also sentenced 12 others involved in the blasts to life imprisonment on Nov. 29.


The explosions damaged the churches, but the only deaths were of two people suspected of involvement in the bombings. The convicted are members of a Muslim sect, Deendar Anjuman (organization for duty).


इस फैसले के अनुशार चर्चों में बम्मविस्फोट मुसलिम संगठन दीनदार अंजुमन ने करवाए थे। ये हमले करने के जुर्म में पकड़े गए 27 लोगों में से 4 को छोड़ दिया गया व 11 को फांसी की सजा सुनवाई गई तथा 12 को उम्रकैद की सजा सुनवाई गई।


अब सोचने वाला विषय ये है कि जिन लोगों ने हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के वारे में अफवाहें फैलाकर संसार में भारत व हिन्दूओं की छवि खराब करने की कोशिश की ये कौन लोग हैं?


बास्तब में ये वो लोग हैं जो मुसलिम देशों से पैसे लेकर हिन्दू मुसलिम एकता(The group, now banned, was founded in 1924 in Karnataka to unite Muslims and Hindus, but that aim later changed and members began to work for the Islamization of India through violent activities, the prosecution reportedly told the special court. Police intelligence reports say the sect has some 12,000 followers in villages of Karnataka and neighboring Andhra Pradesh.)


के नाम पर हिन्दूओं की बर्बादी सुनिस्चित करने के लिए मुलिम आतंकवादियों की ढाल के रूप में काम करते हैं।मुसलिम देशों से मिलने वाले टुकड़ों के बदले ये लोग मुसलमानों द्वारा किए गए हर नरसंहार का दोश हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर डालने का हर सम्मभव प्रयास करते हैं।


सेकलर गिरोह का झूठ-इशरत जहां निर्दोष थी


वर्ष 2004 में गुजरात में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में लश्करे तैयवा के चार खूंखार फिदाय़ीन मारे गए।


इन चार में से एक लड़की थी जिसका नाम था इसरत जहां।



 इस इनकांटर के कुछ ही घंटे बाद समाचार चैनलों व समाचार पत्रों ने समचार चलाने शुरू कर दिए कि ये मुठबेड़ फर्जी थी।

http://www.hindilok.com/ishrat-jahan-fake-encounter-creates-question-prasun.html


 बैसे भी सेकुलर गिरोह हर मुलिम आतंकवादी को निर्दोष ही मानता है क्योंकि दोनों का मकसद एक ही है वो है हिन्दूओं का नरसंहार । ये कुछ घंटे भी शायद इसलिए लग गए क्योंकि झूठा समाचार चलाने के लिए इन सेकुलर गद्दारों को कितने पैसे मिलेंगे ये तय होनें में कुछ वक्त लगा होगा।


सौदा तय होते ही समाचार चैनलों ने जंगली कुतों की तरह हिन्दूओं पर भौंकना शुरू कर दिया ।हिन्दूओं व पुलिस को वरबर अत्याचारी सिद्ध करने के लिए तरह तरह की कहानियां प्रसारित की गई।


ये बात अलग है कि मुठबभेड़ के कुछ ही दिनों के अन्दर लश्करे तैयवा ने खुद ये सवीकार कर लिया कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी। Shortly after the 2004 encounter, LeT claimed that Ishrat was its fidayeen through its Lahore-based mouthpiece 'Ghazwa Times'.


इसी वीच मुंबई ATS ने भी अपनी रिपोर्ट में ये खुलासा कर दिया कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी ।


लेकिन सेकुलर गिरोह कहां मानने वाला था उसने तो मुसलिम देशों से मिले पैसे को हलाल करना था हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम कर। इस वार सेकुलर गिरोह ने केन्द्र सरकार के साथ मिलकर नई रणनिती बनाई । इस रणनिती के अनुसार पहले इसरत जहां के परिवार वालों को समाने लाकर उनका रोना-धोना



दिखाया गया बाद में उनसे कोर्ट में केश करवा दिया गया ।


ठीक उसी समय जब कोर्ट में केश करवाया गया लश्करे तैयवा ने भी अपने पिछले बयान से पलटते हुए इसरतजहां का अपना सदस्य होने से इनकार कर दिया। However in 2007, LeT, which was then rechristened as Jamaat-ud-Dawa (JuD), disowned her and issued an apology to Ishrat's family for describing her as a LeT cadre.


ये इस बात का प्रमाण था कि सेकुलर गिरोह व मुसलिम आतंकवादियों के वीच किस तरह के गहरे रिस्ते हें।


मान ,मर्यादा व विस्वास की सब हदें तब पार हो गयीं जब एक जज पी सी तमांग ने भी सेकुलर गिरोह के भारतविरोधी दुशप्रचार का सिकार होकर इसरत जहां को निर्दोश करार दे दिया।( तमांग की आख्या में कहा गया है कि इसरत जहां और उसके साथ मारे गये उसके तमाम साथी निर्दोष थे तथा गुजरात पुलिस ने कथित आतंकियों को मुम्बई से पकडकर लाई, दो दिनों तक अवैध पुलिस अभिरक्षण में रखी और फिर उसे मार कर मुठभेड दिखा दिया गया। न्यायमूर्ति तमांग की आख्या कहता है कि गुजरात पुलिस ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि कुछ अधिकारियों को मुख्यमंत्री के सामने अपना कद उंचा करना था)


http://www.pravakta.com/?p=3663  ( पढ़ें)


बस फिर क्या था कांग्रेस ने खुलकर मोदी को मौत का सौदागर व आतंकवादी इसरत जहां को मासूम निर्दोष प्रचारित करना शुरू कर दिया। कांग्रेस की वेशर्मी व गद्दारी का सबसे बढ़ा प्रमाण उस वक्त सामने आया जब ये पता चला कि ततकालीन कांग्रेस सरकार नमे खुद माननीय न्यायलय में हलफनामा देकर ये सवीकार किया था कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी।


लेकिन कांग्रेस जानती है कि हिन्दू वेवकूफ हैं वो कहां इतनी गहराई में जाकर कांग्रेस की गद्दारी का पर्दाफास करने की कोशिस करेंगे। इसलिए मुसलिम आतंकवादियों को खुश करने के लिए आतंकवादी का साथ देना शुरू कर दिया कांग्रेस के नेतृत्व में सारे सेकुलर गिरोह ने।


ऐसा नहीं कि इससे पहले कांग्रेस ने इस आतंकवादी का साथ नहीं दिया था। 2000 में इसरत जहां के जनाजे में कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के हजारों कार्यकर्ता सामिल हुए ते।


ततकाली महाराष्ट्र सरकार ने इस आतंकवादी के परिवार को हरजाने के नाम पर आर्थिक मदद भी की थी।

यह वही कांग्रस है जिसने 2004 में सता में आते ही आतंकवादियों से लड़ाई के दौरान शहीद होने वाले अर्धसैनिक बसों को मिलने वाली आर्थिक सहायता ये कहकर कम कर दी थी कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं।

http://samrastamunch.spaces.live.com/Blog/cns!1552E561935CF20F!532.entry    (पढ़े) 


आज जबकि NIA के सामने मुसलिम आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ये सवीकार कर चुका है इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी तब आप समझ सकते हैं कि कौन सही है और कौन गलत।


क्या ये सारी बातें इस बात का प्रमाण नहीं कि इसरत जहां द्वारा मोदी को मारने की योजना की जानकारी सेकुलर गिरोह व कांग्रेस को थी ।जानकारी ही नहीं वल्कि सेकुलर गिरोह का समर्थन भी इसरत जहां को प्राप्त था।


ऐसा नहीं कि ये सेकुलर गिरोह का एकमात्र झूठ है जिका पर्दाफास हुआ है। सैंकड़ों ऐसे झूठ हैं जो सेकुलर गिरोह ने हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए फैलाए और बाद में उन झूठों का परदाफस हुआ।


ऐसा नहीं कि अब इस गिरोह ने झूठ फैलाने वन्द कर दिए हें।


आपको याद होगा कि जब 2001 में ततकालीन गृहमन्त्री लालकृष्ण अडवानी जी ने सिमी(SIMI) को आतंकवादी संगठन घोषित किया तो समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में कांग्रेस सहित सभी सेकुलरगिरोह के सदस्यों ने अडवानी जी को मुसलिम विरोधी करार दिया। कौन सही था कौन गलत इसका प्रमाण आगे चलकर तब मिला जब SIMI ने दर्जनों बम्मविस्फोट कर हजारों वेगुनाह हिन्दूओं का कत्ल कर लाखों को नुकसान पहुंचाया।


आपको वो भी याद होगा कि जब गोधरा में 2000 मुसलमानों की भीड़ ने ट्रेन में आग लगाकर 58 हिन्दूओं को जिन्दा जला दिया । हिन्दूओं से सहानुभूति जताना तो दूर कांग्रेस सरकार ने बैनर्जी नामक भ्रष्ट जज से झूठी रिपोर्ट तैयार करवाकर ये कहलवा दिया कि आग हिन्दूओं ने खुद लगावाई थी।


ये सब सेकुलर गद्दारों ने तब किया जब माननीय नयायालय द्वारा नानवटी आयोग के माध्यम से जांच जारी थी।अब आप खुद सोचो कि सेकुलर गिरेह किस हद तक मुसलिम आतंकवादियों का साथ देकर हिन्दूओं का नरसंहार करवाने पर तुला है।


सेकलर गिरोह द्वारा आतंकवादियों को दिए जा रहे खुले समर्थन का ही परिणाम है कि कशमीर घाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया गया।


सेकुलर गिरोह के आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणामसवारूप ही आसाम में बंगलादेशी मुसलिम आतंकवादियों ने जड़े जमाकर हिन्दूओं को उजाड़ना सुरू कर दिया।


सेकुलर गिरोह के आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणास्वारूप ही हिन्दूओं का कत्ल व जबरदस्ती धर्मांतरण कर उतर-पूर्व के कई राज्यों में इसाईयों की जनसंख्या 98% तक जा पहूंची।


आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणास्वारूप ही आज माओवादी आतंकवादी सारे देश में कोहराम मचा रहे हें। कुल मिलाकर भारत के अधिकतर राज्य आतंकवाद प्रभावित है।


सेकुलर गिरोह का हौसला अब इतना बढ़ गया है कि उसने सीधे सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जिसका विबरण हम अपने पिछले लेखों में दे चुके हैं।


आप सब जानते हैं कि किस तरह मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों का दोष हिन्दूओं के सिर डालने के लिए लैप्टीनैंट कर्नल पुरोहित ,साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित कुल 27 हिन्दूओं को विभिन्न जेलों में डालकर यातनायें दी जा रही हैं व मुसलिम आतंकवादियें की मददगार केन्द्र सरकार द्वारा हिन्दू आतंकवाद-हिन्दू आतंकवाद चिला चिलाकर हिन्दूओं को झूठे मामलों में फंसाकर देशभक्त हिन्दूओं को आतंकवादी के रूप में बदनाम करने की कोशिस की जा रही है जिसका परदाफास उस वक्त हुआ जब माननीय न्यायालय ने हिन्दूओं पर झूठे केश दर्ज कर लगवाया गया मकोका यह कहकर हटा दिया कि लगाए गए आरोप अधारहीन हैं।


कांग्रेस की वेशर्मी का एक और प्रमाण आपके सामने है कि पुणे बम्मविस्फोट के आरोपी( जो पहले भी अबैध रूप से हथियार रखने का दोशी पाया जा चुका है) को एक पखवाड़ें के अन्दर छोड़ दिया गया जबकि दूसरी तरफ माननीय न्यायलय द्वारा आरोप अधारहीन बताने के बाबजूद पिछले 2 बर्ष से हिन्दूओं को जबरदस्ती जेल में रखा गया है।


हमें उम्मीद ही नहीं पूरा विस्वास है कि वो वक्त बहुत जल्दी आएग जब जागरूक हिन्दूओं की मेहनत से बौद्धिक गुलाम हिन्दू सेकुलर गिरोह की असलियत पहचानकर जागरूक होकर सेकुलर गिरोह के मकड़जदाल में फंसे हिन्दूओं को जागरूक कर देश से आतंकवादियों व आतंकवादियों के समर्थकों का नमोनिशान मिटा देंगे।






July, 2010

आओ हम बताते हैं आपको कि बाबा अमरनाथ यात्रा शरू होने से ठीक पहले घाटी में आग किसने लगाई और किसने हबा दी।

आओ हम बताते हैं आपको कि बाबा अमरनाथ यात्रा शुरू होने से ठीक पहले घाटी में आग किसने लगाई और किसने हबा दी।



हम अक्कसर बहुत सी बातों को जानते हुए भी उनके प्रति आँखें मूंदकर अपनी बरबादी को अपने पास आने देते हैं। होना तो ये चाहिए था कि जब मुसलमानों ने 1985 में अलकायदा की स्थापना के बाद



1986 में कशमीरघाटी में हिन्दूओं व सुरक्षाबलों पर हमले शुरू किए उसी बक्त या तो सेना को खुला हाथ देकर हमलाबरों की कबर घाटी में ही खोद दी जाती या फिर सरकार द्वारा सैनिकों को खुला हाथ न देने की स्थिति में हिन्दू खुद अपने हिन्दू भाईयों की रक्षा की खातिर देश के अन्य हिस्सों में मुसलिम आतंकवादियों व उनके समर्थकों पर हमले शुरू कर आतंवादियों पर दबाब बनाकर आतंकवादियो को हिन्दूओं पर हमले रोकने पर मजबूर करते।


इससे न केबल कशमीरघाटी में हिन्दूओं की रक्षा होती बल्कि साथ ही आसाम व उतर पूर्ब सहित अन्य राज्यों में भी आतंकवादियों व उनके समर्थकों को सबक मिलता हिन्दूओं पर हमला न करने का।


यहां तो उल्टा हुआ उधर मुसलमानों ने हिन्दूओं पर हमले शुरू किए इधर सेकुलर गद्दारों ने उनके समर्थन में समाचार चैनलों ,पत्र-पत्रिकाओं व अन्य साधनों का उपयोग कर महौल बनाना शुरू कर दिया।


देश में जिस भी संगठन या वयक्ति ने हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में आबाज उठाई उसे बड़ी वेशर्मी से सांप्रदायिक करार देकर मुसलिम आतंकवादियों को अपने कुकर्मों को जारी रखने के लिए उकसाया गया।


परिणामस्वारूप कशमीर घाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दिया गया।

ये काम अन्जाम दिया गया मस्जिदों व मदरसों से दुशप्रचार कर व लोगों को हिन्दूओं पर हमले करने के लिए उकसाकर।


अब जबकि घाटी से हिन्दूओं का लगभग सफाया हो चुका है मुसलिम आतंकवादियों ने पिछले कई बर्षों से सुरक्षाबलों पर हमले तेज किए हुए हैं।

आज शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता है जिस दिन देश की रक्षा की गारंटी हमारे बहादुर सैनिक शहीद नहीं होते।



अब जबकि कशमीरघाटी में सिर्फ मुसलिम आतंकवादी और उनके मददगार ही शेष बचे हैं तो फिर ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसके कारण हमारे सैनिक अपनी रक्षा तक नहीं कर पा रहे हैं ।


सैनिकों के इस तरह कत्ल होने का एकमात्र कारण है केन्द्र


व राज्य सरकार का



आतंकवाद समर्थ रबैया। इन सराकारों ने आतंकवादियों के हमलों को सफल बनाने व सुरक्षावलों द्वारा निर्णायक जबाबी कार्यवाही न करने देने के लिए सेना के अधिकारों को इतना कम कर दिया है कि आतंकवादी वेखौफ होकर सैनिकों के बंकरों व टुकड़ियों पर हमला कर रहे हैं।



आज भी सरकार मुसलिम आतंकवादियों की विजय सुनिस्चित करने के लिए सेना पर और प्रतिबन्ध लगाने के चक्कर में है। जिसका सेना के तीनों अंगों के सेना प्रमुख विरोध कर रहे हैं। पर सरकार कहां मानने वाली है उसे तो हर हाल में मुसलिम आतंकवादियों की जीत सुनिस्चित करनी है मानबाधिकों को ढ़ाल बनाकर। पिछले दिनों में शायद ही ऐसी कोई घटना होगी जिसमें सैनिकों द्वारा आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने पर सरकार ने सैनिकों के विरूद्ध मुकद्दमा दर्ज नहीं किया होगा।


मुसलिम आतंकवादियों के इरादों का पता आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जैसे ही कसमीरघाटी में बाबा अमरनाथ यात्रा शुरू होती है बैसे ही ये आतंकवादी अपने हमले तेज कर सैनिकों को उलझाकर इस पबित्र यात्रा में बाधा पैदा कर तीर्थ यात्रियों पर हमले शुरू कर देते हैं।


ऐसा नहीं कि सरकार इस यात्रा में कोई ब्याबधान नहीं डालती। हर बर्ष की तरह इस बर्ष भी सराकर ने लंगर लगाने बालों से 25000 रूपए का भारी भरकम जजियाकर बसूल किया । जब इतने से जिहादी मुसलिम उमर अबदुल्ला का मन नहीं भरा तो तीर्थ यात्रियों को ले जाने वाली बसों का एक दिन का टैक्स 2500 रूपए कर दिया गया मतलब टैक्स के साथ जजिया कर भी लगा दिया गया। इसेके अतिरिक्त यात्रीयों से रजिस्ट्रेसन फीस के नाम पर जजिया बसूला गया सो अलग।


हमें तो यह सोचकर ही हैरानी होती है कि जो सरकार मक्का मदीना की यात्रा के लिए प्रति मुसलमान 60000 रूपए की खैरात बांटती है माननीय नयायालय द्वारा रोक लगा देने के बाबजूद वही सरकार किस मुंह से हिन्दूओं की धार्मिक यात्राओं पर जजिया कर लादकर रूकबटें पैदा करती है?


इसे भी जयादा हैरानी हमें उन बैद्धिक गुलाम हिन्दूओं पर होती है जो सरकार के इन भेदभावपूर्ण अमानबीय सरोकारों का विरोध करने की जगह विरोध कर रहे जागरूक हिन्दूओं पर धावा वोल देते हैं।


अपने इन बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं के सहयोग की बजह से भारतविरोधी देशविरोधी ताकतें (चाहे वो पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादी हों या फिर चीन समर्थक माओवादी आतंकवादी या फिर धर्मातरण समर्थक इसाई आतंकवादी ) आगे बढ़ती जा रही हैं जिसके परिमामस्वारू हर भारतीय के जानमाल पर खतरा बढ़ता जा रहा है।


आओ पूर्वाग्रहों व दुशप्रचार से आगे निकलकर भारतविरोधियों का विनाश सुनिश्चित करेन के लिए एकजुट होकर काम करें।




July, 2010

सेकुलर माओबादी आतंकवादियों के हमले में 27 सैनिक शहीद व 7 घायल। इन सेकुलर तालिवानों ने कत्ल के बाद शवों से घिनौनी हरकतें कर एक वार फिर अपनी तालिवानी प्रवृति का प्रमाण दिया।

सेकुलर माओबादी आतंकवादियों के हमले में 27 सैनिक शहीद व 7 घायल। इन सेकुलर तालिवानों ने कत्ल के बाद शवों से घिनौनी हरकतें कर एक वार फिर अपनी तालिवानी प्रवृति का प्रमाण दिया।


आओ सबसे पहले शहीद सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए परमपिता परमातमा से प्रर्थना करें ।भगावना शहीद सैनिकों के परिजनों को इस अपूर्णीय क्षति को सहने करने की ताकत दे। भगवान घायल सैनिकों को शीघ्र स्वास्थय लाभ प्रदान कर उनके परिवारों का सहारा बरकरार रखे।



शत्रुओं से युद्ध में सैनिकों का सहीद होना कोई नई बात नहीं । यहां नई बात यह है कि अपने ही देश के नागरिक विदेशीयों के इसारे पर अपने ही लोगों का खून बहाने पर अमादा हैं।


जब अपने ही लोग( बैसे इनकी हरकतें देखकर इन राक्षसों को अपना कहना भी वेबकूपी ही है।) विदेशीयों के हाथों विक कर खूनखराबा करने लगें तो सरकार की जिम्मेदारी होती है सुरक्षाबलों के हाथ मजबूत कर बिदेशी साजिसों को विफल करना ।


लेकिन जब सरकार ही एक विदेशी की गुलाम हो तो आप सरकार से क्या उमीद करते हैं?






समान्य हालात में ये माना जाता है कि विदेशी खुद की देश के प्रति अपनी बफादारी साबित करने के लिए जोरदार तरीके से सैनिकों का समर्थन कर मनोबल बढ़ाकर ऐसे लोगों से निपटेगी । पर यहां तो विदेशी को पूरा भरोसा हो चला है कि देश में भारतविरोधी सेकुलर गद्दारों की चलती है इसलिए ये विदेशी सैनिकों पर वेढ़ियां डालकर उनको आतंकवादियों के हाथों हिंसा का सिकार होने पर बाध्य कर रही है।


जब देश की सरकार विदेशी की गुलाम होकर देश के विरूद्ध काम करे तो लेखक-आज की भाषा में वोलें तो-पत्रकार और सपष्ट वोलें तो समाचार पत्रों व चैनलों की जिम्मेदारी होती है कि वो जनता को सरकार की गद्दारी से अबगत करवाकर देश में क्रांति का शूत्रपात करें।


पर जब कलम भी विदेशीयों के हाथों विक कर उनकी कठपुतली बन जाए तो एक ही रास्ता बचता है और वो है सेना द्वारा गद्दार नेताओं को गोली मारकर सता अपने हाथ में लेकर देश से गद्दारों व उनके समर्थकों का नमोनिशान मिटाना।



आओ सेना से अपील करें ताकि वो हम सब भारतवासियों की आदमखोर पाकिस्तान समर्थक मुसलिम आतंकवादियों, चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों व रोम समर्थक ईसाई आतंकवादियों से रक्षा कर देश को शांति के मार्ग पर लौटाने का अपना फर्ज गद्दारों का नमोनिशान मिटाकर निभा सकें।


ऐसा नहीं कि सैनिकों का ये नरसंहार पहला है इससे से पहले भी ये आतंकवादी सरकार की आतंकवाद समर्थक नितीयों के कारण कई नरसंहार अंजाम देकर बच निकलने में सफल रहे हैं गद्दार सेकुलर गिरोह की सहायता के कारण।


• दिनांक 29-060-10 को छतीसगढ़ के नारायमपुर जिले के दौराई रोड़ पर बामपंथी आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में 27 सैनिक शहीद हुए व 7 जख्मी।कत्ल के बाद शवों के साथ छेड़छाड़।


• दिनांक 08-05-10 छतीसगढ़ के वीजापुर जिले में बामपंथी आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में 8 सी आर पी एफ जवान शहीद हुए।


• दिनांक 06-04-10 को छतीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बांमपंथी आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में 75 सैनिक शहीद हुए ।


• दिनांक 04-04-10 को उड़ीसा के कोरापुट जिले में बामपंथी आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में सुरक्षाबलों के 11 जबान शहीद हुए।


• दिनांक 15-02-10 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के सिलदा में लगे एक कैंप में बामपंथी आतंकवादियों ने 25 सैनिकों को जिन्दा जला दिया गया। जिसके बाद पुलिस के एक बढ़े अधिकारी ने विद्रोह कर दिया और जनता को बताया कि उसने भीड़-भाड़ वाले इलाके में कैंप लगाने का विरोध किया था लेकिन बामपंथी मुख्यमन्त्री ने जबरदस्ती वो कैंप ऐसी जगह लगवाया जहां सुरक्षावलों पर असानी से हमला किया जा सके।


• दिनांक 08-10-09 को महाराष्ट्र के गढ़चरौली जिले के लैहरी सटेसन पर बामपंथी आतंकवादियों ने हमला कर 15 पुलिस वालों को शहीद कर दिया।




ये तो हमने पिछले लगभग 6-8 महीनों के सिर्फ वो हमले बताए जिनमें सुरक्षाबलों के दर्जनों जवान शहीद हुए।


इन बामपंथी आतंकवादियों ने आज तक हजारों आम नागरिकों का भी कत्ल किया है ।

शायद आपको याद होगा हाल ही में ट्रेन पर किया गया वो हमला जिमें सैंकड़ों लोग मारे गए व सैंकड़ों ही घायल हुए।




इस हमले के बाद आतंकवादी माओवादियों ने आरोप लगाया कि कत्ल सतारूढ़ बामपंथियों ने किया है। बैसे ये बामपंथी आतंकवादी सता में आने पर भी लोगों की कत्लोगारद मचाकर ही चुनाब में बोट लेने में विस्सास रखते हैं।


कौन भुला सकता है कि किस तरह आए दिन राजनितिक बांमपंथी मतलब CPM के हथियारबन्द आतंकवादी तृणमूल के कारयकर्ताओं को निशाना बनाते हैं।


ऐसा नहीं कि CPM के आतंकवादियों की इस हिंसा के सिकार सिर्फ एक ही पार्टी के कार्यकर्ता होते हैं कांग्रेस और भाजपा के भी सैंकड़ों कार्यकर्ता इन आतंकवादियों की हिंसा के सिकार हो चुके हैं। आज(30-06-10) ही झारखंड में छोटे कांग्रेसी नेता का कत्ल किया गया।


RSS के कितने कार्यकर्ता इन CPM आतंकवादियों के सिकार हुए हैं ये तो आप उन्ही से पता करो तो वेहतर होगा पर हमारी जानकारी के अनुसार ये शंख्या बहुत बढ़ी है।हमने You Tube पर एक रिकार्डिंग देखी थी जिसमें बामपंथी आतंकवादी RSS के एक कार्यकर्ता की चमड़ी उधेड़ रहे थे। साथ में कह रहे थे वोल गई तेरी देशभक्ति कि नहीं।


आम नागरिकों के उपर इन बामपंथी आतंकवादियों ने क्या-क्या जुल्म ढ़ाए हैं वो बयान करना हमारे बस की बात नहीं।


कितनी ही पाठशालायें, पंचायत भवन,चिकितसालय व सड़कें इन बामपंथी आतंकवादियों ने आज तक उड़ा दिए ये जानकारी आप सरकारों से RTI के तहत प्राप्त कर सकते हैं।


आज भी ऐसे देशविरोधी लोगों की कमी नहीं जो इन बांमपंथी आतंकवादियों को गरीबों का मसीहा कहते नहीं थकते । मजे की बात है कि गरीबों का खून चूसने वाले इन बामपंथी आतंकवादियों का गरीबों की लूट से तैयार किया गया लूट का सालाना बजट 16000 करोड़ रूपए का है।


जिसक उपयोग ये गरीबों के लिए बनाई जा रही सड़कों , चिकितसालयों,पाठशालाओं को बम्मों से उड़ाने के लिए करते हैं। इस सब ये इनका दिल नहीं भरता तो ये अकसर गरीबों का खून बहाकर उनकी मां-बहन-वेटियों की जिन्दगी को दुस्वार बना देते हैं।


माओवादी आतंकवादियों का सबसे बड़ा मददगार है सेकुलर गिरोह




जिसमें खुद केन्द्र सरकार व कई राज्य सरकारें सामिल हैं ।सेकुलर गिरोह की इस गद्दारी को छिपाने वा माओवादी आतंकवादियों का आगे बढ़ाने में सक्रिए सहयोग दिया जाता है मिडीय द्वारा।


जब भी माओवादी आतंकवादियों के हमले में सैनिक शहीद होते हैं ये गिरोह सैनिकों की कमियां गिनाकर जनता में आतंकवादियों के प्रति पैदा होने वाले आक्रोस को कम करने का हर सम्मभव प्रयत्न करता है जिसके परिणामस्वारूप ये माओवादी आतंकवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।


सरकार का मोओवादी आतंकवादियों को किस सतर का समर्थन प्राप्त है इसका अन्दाजा इसी बात से हो जाता है कि जब गृहमन्त्री पी चिदमबरम ने आतंकवादियों से सख्ती से निपटने की बात की तो पहले कांग्रेस महासचिब दिगविजय सिंह ,मणिसंकर अययर व बाद में गद्दारों की सरदार इटालियन अंग्रेज एंटोनिया ने खुलकर माओवादी आतंकवादियों का समर्थन कर गृमन्त्री की योजना को रूकवा लगा दिया।


अब ऐसे हालता में जब सेकुलर गिरोह से जुड़ा हर ब्यक्ति व संगठन माओवादी आतंकवादियों का समर्थन कर रहा है तो सेना द्वारा तखतापलट के सिवा देश को बचाने को और कोई रास्ता नहीं दिखता ।


आज से लगभग 15-20 बर्ष पहले से देश के बहुत से हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन व अन्य देशभक्त संगठन चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों की बढ़ती देशविरोधी गतिविधियों पर अंगुली उठाते रहे हैं लेकिन सेकुलर गिरोह ने मिडीया का उपयोग कर इन आदमखोर तालिवीनों को गरीबों का मसीहा करार देकर सब संगठनों को चुप करवा दिया।


शायद सेकुलर गिरोह को लगता है कि इन माओवादी आतंकवादियों की सहायता से देश की संसकृति और सभ्यता को असानी से शीघ्रताशीघ्र समाप्त किया जा सकता है। आपको लालू से लेकर दिगविजय व ऐंटोनिया जैसे अनेक सेकुलर नेता व पार्टियां मिल जाएंगी जिन्होंने इन आतंकवादियों की सहायता लेकर चुनाब जीता ।


मकसद सिर्फ एक कि किसी तरह देशभक्ति व हिन्दूत्व की बात करने वाले संगठनों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।


अपने इस मकसद को पूरा करने के लिए सेकुलर गिरोह ने पाकसमर्थक मुसलिम आतंकवादियों ,चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों व धर्मांतर समर्थक इसाई आतंकवादियों को एकजुट होकर हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों पर हमला वोलने का मौका दिया।




आपको याद होगा कि किस तरह उड़ीसा के कंधमाल में ईसाईयों द्वारा हिन्दू सन्त का कत्ल करने पर माओवादी आतंकवादियों ने उनके कत्ल की जिम्मेदारी अपने सर पर ली ।


हिन्दू सन्त का कत्ल करने के बाद ईसाई आतंकवादियों ने वहां पर पर्चा छोड़कर लोगों को बताया कि क्योंकि हम देश को धर्मनिर्पेक्ष बनाना चाहते हैं इसलिए इस हिन्दू सन्त का कत्ल किया गया।


उसके बाद सरकार ने माओवादी या ईसाई आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए हिन्दूत्वनिष्ठ देशभक्त संगठनों पर धाबा वोल दिया। जिसके परिणासवारूप जनता ने अपने हिसाब से प्रतिक्रिया की जिस पर रोना-धोना आज तक जारी है।


माओवादी आतंकवादियों ने जिस क्षेत्र में भी अपने पैर पसारे सबसे पहले उस क्षेत्र में इन आतंकवादियों ने हिन्दूओं के आस्था के केन्द्रों पर प्रहार किया।


यहां तक कि अपने प्रभाव वाले क्षत्रों में मर्यादापुरषोत्तम भगवान श्रीराम तक का नाम लोने पर प्रतिबन्ध लगा दिया। ये कदम कांग्रेस सरकार के उस कदम के समरूप था जिसमें सरकार ने माननीय न्यायलय में लिखकर दिया कि भगवान श्रीराम हुए ही नहीं।


सेकुलर गिरोह व माओवादी आतंकवादियों की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सोच की समरूपता ही आज सेकलरगिरोह की केन्द्र सरकार को इन सेकुलर आतंकवादियौं के विरूद्ध कार्यवाही करने से रोक रही है। कांग्रेस को लगता है कि माओवादी आतंकवादियों की हार धर्मनिर्पेक्षता की हार व राष्ट्रवाद की जीत है।


इसीलिए केन्द्र सरकार सेना को खुला हाथ देने के बजाए सुरक्षाबलों पर और वेढ़ियां डालने की बात कर रही है। वेशक गृहमन्त्री ने जनता के दबाब को कम करने के लिए आप्रेसन ग्रीनहंट की शुरूआत की पर केन्द्र सरकार के आकाओं ने ही इस आप्रेसन को पलीता लगा दिया।


आज जिस तरह से इन सेकुलर आतंकवादियों ने शहीद हुए सैनिकों की लाशों के साथ छेडछाड़ की वो वही तरीका है जो तालिवानी मुसलिम आतंकवादी अपनाते रहे हैं।


सेकुलर तालिवानों  के हमले में  शहीद सैनिक के विना सिर के शब को को उठाते अन्य  सैनिक।




नक्सलियों की क्रूरता चरम पर, जवानों के सिर काटे



रायपुर। नक्सलियों की क्रूरता का तांडव जारी है या यू कहें कि नक्सलियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। मंगलवार को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवानों को न सिर्फ मार डाला बल्कि जवानों के सिरों को कलम कर दिया और कुछ के सिर तक कुचल डाले। नक्सलियों की इस घिनौनी हरकत से साबित होता है कि उन्हें किसी बात का खौफ नहीं है। वो जब चाहे, जहां चाहे कुछ भी कर सकते हैं और सरकार सिर्फ तमाशबीन बनी देखती रहेगी।


Naxals slit CRPF men's throats, smashed heads


"The Naxalites shot dead the CRPF personnel from a distance and later, they slit open the throats of three and smashed heads of two other jawans," a top police official told PTI.




हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों को समाप्त करवाने के चक्र में कांग्रेस सरकार ने न जाने कितने सैनिकों व आम लोगों की बली चढ़ा दी ।

हमें तो आशा है कि सरकार को ये बात समझ आ गई होगी कि किसी विचारधारा को खत्म करने के लिए सेकुलर आतंकवाद को आगे बढ़ाना कितना खतरनाक है।

आखिर राजनीति भी तभी तक हो सकेगी जब तक देश है जब देश ही नहीं रहेगा तो कहां राजनिती करोगे?


इस कांग्रेस सरकार ने माओवादी आतंकवादियों को फायदा पहुंचाने के लिए ततकालीन नेपाल सरकार को सैनिक सहायता बन्द कर दी । परिणामस्वारूप नेपाल पर माओवादियों के कब्जे के साथ ही नेपाल पर चीनी बर्चस्व बढ़ गया। साथ ही नेपाल पर कब्जे के बाद माओवादी आतंकवादियों ने भारत में भी हमले तेज कर दिए।


ऐसा नहीं कि इन सेकुलर आतंकवादियों ने लाशों से छेड़छाड़ कर पहलीबार अपनी तालिवानी मानसिकता का परिचय दिया हो इससे पहले भी ये सेकुलर आतंकवादी लोगों का सिर कलम कर अपनी तालिवानी प्रवृति का प्रमाण दे चुके हैं।


हमारे विचार में इन सेकुलर आतंकवादियों द्वार किए जा रहे नरसंहारों के लिए इन आतंकवादियों के साथ-साथ इनके मददगार भी उतने ही जिम्मेदार हैं।


अगर सरकार में थोड़ी भी शर्म वाकी है तो सबसे पहले इन सेकुलर आतंकवादियों के मददगारों को हाबालात में बन्द किया जाए पर अफसोस इन मददगारों में सबसे आगे सरकार में ही बैठे लोग हैं।





अन्त में हम फिर कहेंगे कि सेकलर गिरोह समर्थित व पोषित  आतंकवाद के भंवर में फंसते देश को बचाने के लिए सैनिक सासन के अलावा और कोई रास्त नहीं वो भी यथाशीघ्र बरना बहुत देर हो जाएगी।


July, 2010

आओ अपनी भारतीय सेना के साथ मजबूती से खड़े होकर गद्दारों का सर्वनाश सुनिस्चित करें।

आओ अपनी भारतीय सेना के साथ मजबूती से खड़े होकर गद्दारों का सर्वनाश सुनिस्चित करें।


 

 

हमने आपको पिछले कई लेखों में बताया कि किस तरह एंटोनिया की गुलाम कांग्रेस सरकार ने अपने अन्य सेकुलर गिरोह के साथियों की सहायता से कशमीर घाटी सहित देश के अधिकतकर हिस्सों में भारतीय सेना सहित सबके सब सुरक्षाबलों को आत्मरक्षा के अधिकार से बंचित कर दिया है। जब भी आतंकवादी सुरक्षाबलों पर हमला करते हैं तब सरकार आतंकवादियों से सख्ती से निपटने के बजाए सुरक्षावलों पर दबाब बनाना शुरू कर देती है। परिणामस्वारूप सुरक्षावलों को लगातार जान-माल की हानि उठानी पड़ रही है वो भी विना आत्मरक्षा के लिए लड़े विना।


हैरानी तो इस बात की है कि अधिकतर समाचार चैनल व समाचार पत्र भी आतंकवादियों के विरूद्ध जनता को जागरूक करने के बजाए आदमखोर आतंकवादियों का खुल कर बड़ी वेशर्मी से समर्थन कर रहे हैं।

जोगिन्द्र जी पहले ही पहराग्राफ में जिस तसवीर की बात कर रहे हैं वो ये है।



आतंकवादियों द्वारा सुरक्षावलों पर किए जा रहे हमलों के बाद सरकार किस हद तक आतंकवादियों का साथ दे रही है उसका प्रमाण है फारूक अबदुल्ला का ये बयान।


हम ज्यादा न लिखते हुए आपसे सिर्फ इतनी उम्मीद करते हैं कि आप इस लेख को ध्यान से पढ़ने के बाद सरकार के आतंकवाद समर्थक कदमों का विरोध करते हुए अपने देश की रक्षा की खातिर संसार की सबसे अधिक संवेदनशील  भारतीय सेना के साथ खड़े होगें।



June, 2010

क्या आपको ये तसवीरें देखकर लगता है कि सुरक्षाबल वेकाबू हैं जैसा कि आतंकवादियों का मददगार उमर अबदुल्ला आरोप लगा रहा है ?

यहां जिस युबक की मौत का जिक्र किया जा रहा है जानते हो वो कौन था व कैसे मरा ? सोपोर में आतंकवादियों व सुरक्षावलों के वीच मुठबेड़ हुई जिसमें आतंकवादी मारे गए। इस मुठभेड़ के बाद जब सुरकक्षावल बापस लौट रहे थे तो इस नबयुबक सहित दर्जनों आतंकवादियों के मददगारों ने सुरक्षाबलों पर हमला बोल दिया। इस हमले में सुरक्षाबलों की गाड़ी जला दी गई ब सुरक्षाबलों को भी मारने कोशिश कोशिश की गई। इस संघर्ष में ये आतंकवादी मारा गया जिसका राज्य का जिहादी मुख्यमन्त्री विरोध कर रहा है। अब प्रश्न सिर्फ इतना सा है कि जो भी कातिल आतंकवादियों के समर्थन में सुरक्षाबलों पर हमला करे वो व उसका समर्थन करने वाले गद्दार नहीं तो और क्या हैं?


गद्दारी की सजा मौत के सिवा और क्या हो सकती है ?


अबदुल्ला परिवार वो परिवार है जिसने नेहरू परिवार के सहयोग से कशमीर घाटी से हिन्दूओं का नमोनिशान मिटाया। अब जब कशमीरघाटी में हिन्दूओं की लगभग हर सम्मपति पर मुसलिम आतंकवादी कब्जा जमा बैठे हैं ।सुरक्षाबल लगातार मुसलिम अलगाववादियों के हमले झेल रहे हैं।


एक तरफ सेकुलर गिरोह की केन्द्र सरकार सुरक्षाबलों पर मुकद्दमे पर मुकद्दमा दर्ज कर उनका मनोबल तोड़ने का प्रयत्न कर रही है दूसरी तरफ राज्य सरकार खुलकर आतंकवादियों का समर्थन कर सेना व CRPF पर हमले करवा रही है।


इन सब हालात में सेना व अन्य सुरक्षाबलों को लगातार अपने जबानों को खोना पढ़ रहा है।आए दिन मुसलिम आलगाववादियों द्वारा किए जा रहे हमलों से ढेरों सैनिक घायल हो रहे हैं।


अब आप इस तसवीर को देखकर खुद तय कर लो कि इसे हम विरोध प्रदर्शन कहेंगे या फिर सेना पर हमला।


जिस मकान को ये निसाना बना रहे हैं उसके अन्दर सैनिक हैं सैनिकों के इतने धैर्य के बाद भी अगर ये राक्षस उन पर हमला किए जा रहे हैं तो बजह एक ही है ये आतंकवादी जानते हैं कि केन्द्र और राज्य सरकार ने सुरक्षाबलों के अधिकारों में कमी कर आतंकवादियों को हमला करने की छूट दे रखी है। अब इसके बाद भी अगर केन्द्र सरकार और राज्य सरकार सुरक्षाबलों पर दबाब बनाए जा रहे हैं तो ये गद्दारी की इन्तहां नहीं तो और क्या है?

सैनिकों पर बढ़ते हमलों से निजात पाने के लिए कोई भी देशभक्त सरकार सेना को खुला हाथ देकर यथाशीघ्र अलगाववादियों का सफाया करबाती जबकि गद्दारों की सरदार एंटोनिया की ये गुलाम मनोमोहन सरकार उल्टा आतंकवादियों का साथ देकर सेना व सुरक्षावलों का नुकसान करवाने पर तुली है।


सैनिकों पर प्रतिबन्ध लगाकर आतंकवादियों की सहायता करने का इनका ये काम कोई नया नहीं है।


नेहरू खानदान व अबदुल्ला खानदान के ऐसे ही कारनामों की बजह से कशमीरघाटी में 60000 से अधिक हिन्दूओं का नरसंहार अंजाम दिया गया व 500000 हिन्दूओं को वेघर किया गया।


हम तो सेना के तीनों अंगों के अध्यक्षों से यही विनती करेंगे कि इस सरकार को सता से हटाकर खुद देश की सुरक्षा सुनिश्चित करें ।


आशा है आप भी इस बात से सहमत होंगे।


देखो जरा क्या हालात हैं सुरक्षाबलों के।



सैनिकों पर हमला करने जाते मुसलिम अलगाववादी





सैनिकों को दौड़ा-दौड़ा कर मारते मुसलिम आतंकवादी





सैनिकों को घेर-घेर कर मारते मुसलिम आतंकवादी

मुसलिम आतंकवादियों के हाथों मारे जा रहे सैनिकों पर और दबाब बनाती गद्दारों की राज्य सरकार व केन्द्र सरकार को आप क्या कहोगो?

हम तो एकवार फिर कहते हैं कि मुसलिम आतंकवादियों की मदद करने वाले नोताओं को गोली से उड़ाकर सेना को अपनी व देश की रक्षा खुद अपने हिसाब से करनी चाहिए।